1    कुछ शब्द अपने साथ बहुत ज्यादा घनत्व वाली स्मृति लेकर आते हैं मैं एक शब्द बोलना हूं अघोरी और उसके साथ लड़ी की तरह चली आई है एक फिल्म की याद यह बाला की फिल्म है तमिल भाषा में बनाई गई फिल्म है इसका नाम है ननकन एकदम पट्टी है जिसका पुत्र है और है जन्म के साथ हुई एक भविष्यवाणी की ये अप्रियस लेगा यह भाग्य को जमींदोष कर देगा और बचाने का उपाय बालक को अनाथ की तरह काशी की गलियों में छोड़ दिया जाए ऐसा ही होता है लेकिन मनसन मां का महत्व फिर जगत है फिर बालक की खोज होती है लेकिन अब बालक नहीं है जो छोड़ गया था गलियों में उसे घर मिला शमशान में

 

2.    और वो बन गया घोड़ी आपके दिमाग में मंजर चलते हैं कितनी ही कहानी हैं जो हमने अपने गांव देहात काशन में सनी है कभी फिल्मों में कभी डॉक्युमेंट्रीज में अच्छी हैं लेकिन फिल्म वक्त के लिए इन सब को किनारे कर देते हैं सलेट है जिसको एक गले कपड़े से साफ कर देते हैं अब नया मंजर है एक टापू है अंडमान निकोबार द्वीप समूह में एक व्यक्ति बैठा है जिससे पुछतस की जा रही है व्यक्ति पूछताछ में अपना नाम ओम शास्त्री बताता है और नाम के बाद अगला सवाल तुम्हारी उम्र क्या है और यहां पर सवालों का कांटा अट जाता है क्या ओम शास्त्रीय अघोरी है ओम शास्त्री यह दवा क्यों कर रहा है.

 

3.    की वो सतयुग से अब तक जी रहा है ओम शास्त्री को इंटेलिजेंस एजेंसीज ने क्यों पड़ा है और वो साथ किरदार कौन से हैं जिनके गिर्द ओम शास्त्री का यह वृतांत रचा गया है नमस्कार किताब वाला केक और एपिसोड में आपका बहुत-बहुत स्वागत है इस बार बात नॉनफिक्शन क्षेत्र की तरफ गई है क्योंकि हम फीचर कर रहे हैं एक नहीं दो नहीं तीन तीन कहते हैं इसको अंग्रेजी में यह अक्षत गुप्ता की लिखी तीन किताबें हैं और उसे किताब का शुरुआती प्लॉट मैंने आपको बता दिया है आगे की संधान के लिए कुछ तो यह बातचीत कम आएगी और बाकी आपको भी की रखना होगा की उन हर्फो में क्या हरात और क्या शरारत छुपी है.

 

4.    अक्षय बहुत-बहुत स्वागत है आपका कैसे आया खयाल पीछे सवाल है पर जरूरी है बेटा 6:30 साल का था 2014 में और मार्वल फिल्म का बहुत बड़ा शौक है इसको हर किरदार के बड़े में सब पता था जो विलेंस आने वाले हैं कौन सा सुपर हीरो कैसे बनाएं सब याद और एक दिन दिमाग में है की बहुत बेसिक हमारे भी तो कुछ सुपर हीरो हैं कुछ नहीं हो पाया तो फिर एक कहानी करना शुरू की उनके लिए जिसमें साथ चिरंजीवियों के बड़े में डिटेल में दशावतार के बड़े में डिटेल में हमारी प्रथम के हिसाब से पूरा वक्त कर युगों में जो डिवाइडेड है दशावतार पूछने से दशानन समझ लेते हैं

 

5.    दूर की बात है सतयुग के बाद दुआ पर होता है उनके बोलने पर त्रेता उसके बाद आता है क्योंकि दुआ मतलब तू और ट्राय मतलब 3 तो यह सब चीज अब समझ में तो समझ में आया की हमारी जो हम कुछ पांच छह हजार साल से हम डॉक्यूमेंट कर रहे हैं चीज उसके पहले सब कुछ ही तो कहानियां में बताया जाता था तो लगा की एक कहानी लखनी चाहिए और बच्चों के लेकिन वो बनते बनते ऐसी बन गई क्या वह सभी को बहुत पसंद रही क्योंकि सबके लिए उसमें कुछ ना कुछ सीखने दिया 6 साल लगा के ठीक-ठाक है साक्षी धोनी उनकी उनका प्रोडक्शन हाउस है जिसका नाम धोनी एंटरटेनमेंट तो तीन पार्ट

6.    में फिल्म बनाने की तैयारी चालू स्क्रीन प्ले पर कम चालू हो चुका है राजा बाली अश्वत्थामा विश्वामित्र कृपाचार्य हनुमान जी है वेदव्यास हनुमान अश्वत्थामा कृपाचार्य आठवां चिरंजीवी मारकंडे को भी गिनते हैं मारकंडे को भी ऋषि मारकंडे लेकिन उनको दीर्घायु का वरदान था चिरंजीवी का वरदान नहीं था वो मिक्स कर लेते हैं लोग इसमें बाकी किरदारों को बहुत बात होती है कृपाचार्य के बड़े में महाभारत के प्रसंग ऑन से मिलती है उन पर बहुत ही ज्यादा कम बात होती है तो कृपाचार्य जो है वो अश्वत्थामा के सेज मामा है और अश्वत्थामा और उनके माता पिता नहीं थे

 

7.    द्रोणाचार्य तब कृपाचार्य महाभारत के किरदार बने कृति के आने की वजह से कृपाचार्य की पहचान है यह जब अघोरी का किरदार गधा तो उसके बड़े में रिसर्च कैसे की गई क्योंकि ये एक ऐसा विषय और बहुत सूखता पैदा करता है जब मैं ये कहानी लिखना शुरू किया था तो मैं इंदौर में राहत था उज्जैन छाता हुआ है तो हमारे लिए गोलियां से मिलन उतना कठिन नहीं रहा है पहले से तो थोड़ी बहुत जानकारी परिवार के पुराने लोगों से मिली क्या गली क्या होता है और इस कहानी में ओम शास्त्री जब पकड़ में आया है तो अघोरी के वेशभूषा में पकड़ रहा है

 

8.    बहुत कुछ चुका है सिर्फ एक अघोरी नहीं है पर क्योंकि पुरी कहानी बोलना है की अच्छा कहां जा रहे हो आधार कार्ड दिखाओ तो क्योंकि यह छुपा हुआ है सामने आना इसलिए जब ये पकड़ में आया अघोरी की वेशभूषा में पकड़ और अघोरियों के बड़े में आमतौर पर जितनी बातें हम सुनते हैं बिना संदर्भ के भी सुनते हैं और बिना जान की जो चीज हैं उसके उसकी बैक स्टोरी क्या है अल में उसे सब बातें सही है जितनी भी चीज आप सुनते हैं जैसे जैसे इंसानी मांस खाने में उनको परहेज नहीं है यह सच है

 

9.    मगर हम जब यह एक लाइन की बात करते हैं ना तो ऐसा लगता है की जब आप उसका बैक स्टोरी में जाएंगे की क्यों बच्चा बहुत छोटा होता है तो हम बोलते हैं बच्चा भगवान करो अब वह बच्चा अपने ही माल मूत्र में खेल रहा है सु करके खेल रहा है उसको कोई मतलब है हम बड़े लोग उसको बताते हैं तो उसको नहीं पता की अच्छा क्या और बड़ा क्या जब तक उसको अच्छे बुरे शुद्ध अशुद्ध इन चीजों की समझ नहीं होती ना तभी तक हम बोलते हैं की बच्चे में भगवान का रूप है यह उसे पद्धति से शिवा को अपने की कोशिश कर रहे हैं की हर वह चीज बनाई हुई है तो कुछ जैसे उसे बच्चे को यह समझ में आने जाता

 

10. है की क्या अच्छा है और क्या बड़ा और क्या साफ है और क्या गंदा है अब हम यह बोलना बैंड कर देते हैं की बच्चों में भगवान के रूप में है तो उसे बच्चे के पद्धति से भगवान को यह आत्मा उसे परमात्मा से इस रास्ते मिलने की कोशिश सांसद ना करना खोपड़ी में भजन करना शमशान में रहना जूता का लेना सदा का लेना कहानी भी सो जाना कुछ नहीं पहनना उनके लिए सब एक जैसा है तो जो लोग नॉन वेजीटेरियन खाता हैं उनको थोड़ी ना उससे भी बचत होती है लेकिन आप इस नॉन वेजीटेरियन को बोलेंगे खाने वाले हम तो बोलेगा कैसे बात सबको जीता जाता है इंसान को बनाकर नहीं खाता

 

1    और यह पहले ज्यादा पहले होता था यह चलती थी अब समय के साथ चीजें बदली भी हैं घाटी भी और अभी भी हैं ये सब है इन किताबें को लेक देशभर से दुनिया भर से लोग बहुत ज्यादा पसंद कर रहे हैं खूब साड़ी तारीफे मिल रही हैं शॉर्ट में आपने बताया ही है तो यह ओम शास्त्री नाम का जो किरदार है साथ लोग उसको मिल्क इंटेरोगते कर रहे हैं और वो बोल रहा है की सतयुग से देवभूमि भारत में उन चारों युग जी चुका हूं मैं रामायण का हिस्सा भी था और महाभारत का भी मैं राम से भी मिला और कृष्णा से भी और मैं वो आठवां चिरंजीवी हूं जिसके बड़े में इतिहास के पन्नों में अब तक छुपा हुआ था

 

      जिसके बड़े में दुनिया ने अब तक सुना नहीं है और मैं ढूंढ रहा हूं साथ चिरंजीवियों को जिनका नाम अभी ले रहे थे तो पहले पार्ट आया था तो ठीक-ठाक छोटे से गांव में पैदा हुआ हूं जिसका नाम अंबिकापुर हां वहां पर बड़ी प्यारी सी बात करते थे वहां पर बोलते थे की स्कूल कम थे अस्पताल अभी भी कम ही बेहतर है तो हमारे बीच में बोलते थे की छोटे-छोटे गांव में खोल दें स्कूल जी 500 कक्षा और एक तो गुरुजी हुई हेड मास्टर और रूही है चपरासी स्कूल में शिक्षा के फैंसी जैन दिन बच्चा मनाया उसे दिन शिक्षक करने आया दिन शिक्षक मनाया दिन बच्चा मान्य है और जी दिन दोनों है उसे

 

13. दिन छुट्टी क्या बात है तो वहां से शुरुआत हुई थी पढ़ाई में बहुत अच्छा था नहीं तो छठी में फेल हो गया था तो आसपास वालों ने बोला की बेटा कोई बात नहीं जो होता है अच्छे के लिए होता है समय बड़ा गुस्सा आया की इसमें क्या अच्छा फेल होगा जूनियर्स के साथ पढ़ना पड़ेगा उसे चक्कर में रायपुर पहुंचे हॉस्टल थे तो उन्होंने पहले दिन उन्होंने पूछा की गिव मी डी शॉर्टेस्ट डिफरेंस बिटवीन इन्वेंशन और डिस्कवरी छोटा सिंपल मुझे लगा नहीं कन्वेंस है थोड़ी डर बाद फिर हाथ उठा लिया तीसरी बार फिर हाथ उठाया और बैक फायर हो गया बोले तुम खड़े हो जो

 

14. क्या नाम है तुम्हारा डिफरेंस बिटवीन इन्वेंशन और डिस्कवरी रिएक्शन इस आते योर फादर डिस्कवर्ड योर मदर और इनवेंटेड यू सीट डॉ तो उसे दिन से समझ में आया की इन्वेंशन और डिस्कवरी का अल फराक क्या होता है सिक्स से 10 तक रायपुर में पड़े फिर यूनिटी का भूत स्वर हुआ झगड़ा किया मारपीट हुई है स्कूल से फिर इंदौर पहुंचे तब तक एमपी छत्तीसगढ़ [प्रशंसा] में कोई ऐसी दिक्कत तकलीफ थी नहीं

 

15. साल हम शादी के पहले साथ थे उनकी उम्र थी और उसे समय चीज पहले यह बताने में जीजक होती थी और सोच के गुस्सा आता था अब यह बताने में झिझक नहीं होती है और गुस्सा तो बिल्कुल नहीं आता है क्योंकि आप समझ में आता है की प्रेम की कोई उम्र नहीं होती तो मेरी उसे समय की पत्नी मेरे परिचित दोस्त से प्रेम हो गया हम सब एक ही क्लास में थे तो उन्होंने चयन किया की मेरे मुझे आगे का जीवन उनके साथ बिताना है मैं उसे चीज को मेरी उम्र अभी के बने इस्पात कम थी उसको बहुत अच्छे से ले नहीं का रहा था तकलीफ मेरा कुछ समय डिप्रेशन में गया इसलिए थोड़ी बहुत बार डिप्रेशन पर भी कर

 

16. पता हूं क्योंकि लास्ट फैज और डिप्रेशन तक जाके वापस आया अपना जीवन खत्म करने की कोशिश की विच आई एम नोट प्राउड ऑफ मैं आपको दूध दो लाइन डिप्रेशन पर सोना चाहता हूं शायद हमारे दर्शकों को कम आएगा तो ब्राउन कलर का दिखे जाएगा उसके बाद कुछ नहीं हो सकता क्योंकि सालों से धीरे-धीरे पानी बाहर से रिश्ते सब तोड़ते तोड़ते अब अंदर गया अब हमको समझ में आता है दीवार कमजोर हो गए तो कुछ लाइन है की दीवार पर जब सीलन दिखती है तब मालूम पड़ता है की कटरा कटरा कर पानी रस रहा था अंदर ही अंदर धीरे-धीरे कहानी दीवार पर जब सीलन पड़ती है तब मालूम पड़ता

 

17. है की कटरा कटरा कर पानी रस रहा था अंदर ही अंदर धीरे-धीरे कहानी मुझे शक है की ऐसा सर दीवारों के साथ होता है मैंने अच्छी है वो शेकल जो कटरा का जाति हैं आंखों से रिश्ते नहीं अंदर ही अंदर टूटती है दीवारों की तरह ही गट गट एक रोज ये भी ठहर जाएंगे तो हम दीवार नहीं है विशु टॉक जब हम डिप्रेस्ड हो तो उनको आसपास वालों से बात करनी चाहिए मैं नहीं कर रहा था इस तरीके के की देखो कितना बड़ा फेलियर है आदमी की करने के उसमें भी फेल हो गया तो समय नफरत और गुस्सा बहुत था वो मोटिवेशन का कम किया है मुंबई 2015 तो जब दिल टूटा है सभी का टूटा है तो लगता

 

18. है की प्यार में सब फालतू चीज है आप कभी प्यार में नहीं पद रहा मैं भी ऐसी सोच के चल रहा था फिर जीवन में एक बहुत प्यारी महिलाएं तो फिर से प्यार हो गया तो लगा की प्यार वायर तो सब ठीक है लेकिन शादी नहीं करूंगा क्योंकि शादी तो बहुत ही गड़बड़ हो गया है पर वो बहुत ही अच्छी थी तो फिर शादी कर ली तो एक दिन बालकनी में खड़े होकर सोच रहे थे की गुप्ता जी क्या किया साड़ी गलतियां फिर कर्मरियां आपने तो ये दो लाइन है आपके लिए और निकली की जहां से चले थे फिर वही आकर ठहरे हैं एक उम्र गई समझते की दुनिया गोल है तो यही है आप हिंदी भाषा हिंदुस्तानी जबान में आप इतने निचलात हैं .

 

19. फिर लिखने के लिए अंग्रेजी या मार्केट में थोड़ा बढ़िया असर राहत है या पेंगुइन वाले अंग्रेजी में ज्यादा अच्छा पैसा देते हैं हिंदी में भी छाप गई है हिंदी में प्रभात पब्लिकेशन में छाप है पहले पाठ बाहर चुका है उसका अनुवाद भी मैंने ही किया है बढ़िया तब तो ठीक होगा 25000 से ऊपर का पीस तो वो भी निकाल चुकी है ऑलरेडी तो सेकंड पार्ट अभी साथ जुलाई को रिलीज हो रहा है थर्ड पार्टी हो लेकिन जो लोग बहुत दिन की गति नहीं है उसमें तो भाषा को लेकर आप एक बड़ा अच्छा पत्र सुना रहे थे हम लोगों को रिकॉर्डिंग शुरू होने से पहले हिंदी को उर्दू को लेकर

 

20. और उसको लेकर जावेद अख्तर साहब ने बड़ी आपकी प्रशंसा भी की थी उनको पसंद आया था एक बार कल मिलकर व्याख्या कुछ ऐसा था की कुछ लिखकर सुनाया मैंने अपनी मदर को और माता जी ने बोला की ठीक है पर बहुत अच्छा नहीं है क्योंकि हिंदी और उर्दू तो मैं उसे बात से इत्तेफाक नहीं रख का रहा था तो जब वह अंदर गए तो मैंने उसके जवाब में एक तो लेडीज ऊपर से मदर तो आप बहस तो ना ही करें तो बेहतर तो उसकी जवाब में मैंने जो लिखा वो कुछ इस तरीके से है क्योंकि पूरा मसाला था हिंदी और उर्दू का और दोनों ही हमारी जवानी भाषा है हम अलग कर ही नहीं सकते आप आप दूध और पानी को

 

21. मिलने के बाद अलग कर ही नहीं सकते तो लाइन कुछ ऐसी है की मैं उर्दू में शेयर कहूं खुद को या हिंदी में कभी कम क्या सही होगा दुरुस्त कहना या दुरुस्त को सही कहा जैसे लेकर खींची है हमने जमीन में आसमान में दिलों में जहां में हर आत्मा की हिंदी कहा मैं रख लेट हूं और उर्दू मगर मसाला यह है की इस डी का क्या करें जो हिंदी में भी आता है और उर्दू में भी की यह करके बहुत सुंदर अप्रैल के महीने में हम अमेरिका गए थे

 

22. यूनिवर्सिटी ने बुलाया था तो न्यूयॉर्क में एक म्यूजियम ऑफ मॉडर्न आर्ट है वहां पर बड़ा सुंदर प्रयोग चल रहा है एक बहुत बड़ी सी इलेक्ट्रॉनिक वॉल है और उसको कनेक्ट किया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से और उसे म्यूजियम में आज तक जितनी भी कलाकृतियां आई हैं उन सब को अपने गन रंग के साथ इसमें फीड कर दिया गया है और अब यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का ब्रेन है जो ड्रीम कर रहा है इन सारे वीडियो को प्रोसेस करते हुए और कुछ देख रहा है वह जो देख रहा है वह स्क्रीन पर दिखता है तो बहुत सारे पैटर्न बनते हैं बहुत सारे कलर आते हैं और कोई भी चीज रिपीट नहीं होती है

 

23. आदि का पता नहीं है ना और सबके लिए गुंजाइश है आप इसको कैसे देखते हैं जो की आपने हिंदू लिखा और फिर पुरी आप उसे विचार भी मानसा में कई दरवाजा से दाखिल हुए रिसर्च चल रहा था तो इसको ज्यादातर जगह प्रमोट किया जा रहा है मेथेलॉजिकल साइंस फिक्शन क्योंकि जब आप माइथॉलजी या पुराण की बात करते हैं तो फिर उसमें साइंस की जगह घाट जाति है और प्रेजेंट की जगह तो बिल्कुल ही खत्म हो जाते हैं तो क्योंकि पुरी कहानी इस समय में सेट है इसमें आपको बहुत साड़ी ऐसी चीज मिलेंगे जैसे यह सच है की हनुमान जी ने हनुमान जी छोटी है की हनुमान जी सूरज खाना उड़ गए थे

 

24. फल समझ के तो हनुमान चालीसा मैं पूरे डिस्टेंस लिखा है यार जो बहुत साल बाद नासा ने जब उसको लाइट्स में बताया तो उसका डिफरेंस और हजारों साल पहले लिखे हनुमान चालीसा का जो डिफरेंस है बहुत कम है क्या हमारे पूर्वजों ने हमें वो गति और दूरी सीखने के लिए उसे तरह से कंप्लीट सुश्रुत है ना पहले प्लास्टिक सजन है इस दुनिया के 27 पार्ट्स में उन्होंने कन्वर्ट होकर अरबी कंट्रीज पहुंची बाद में इंग्लिश लैंग्वेज में कन्वर्ट हो के प्लास्टिक सर्जरी बनी और घूम के हमारे पास वापस आई जब गैलीलियो को फैंसी पर टांग दिया गया था की जो की वह एंटीक है क्योंकि उसने बोला

 

25. था की अर्थ गोल है तब भी हम तो ज्योग्राफी को भौगोली कहते थे तो मतलब लैंड और गोल तो गोल है चलिए हो सकता है हमने भूगोल शब्द बाद में दिया हो और गैलीलियो पहले बोल गए हो तो हम और पीछे चलते हैं साउथ मंदिर है अभी कान तारा फिल्म आई थी वराह होता है जिसकी जिनकी बात हो रही है उनके सिंह में गोल पृथ्वी राखी है ना जो शीर्षाला से निकाल गई तो किस हमको अंदर रहते किसी तरीके से तो यह भी पता था की पृथ्वी गोल है हमको यह भी पता था की नो ग्रह हैं तो अभी जब बताया गया की देखो यह सूरज है और यह नो ग्रह घूम रहे हैं और इसको हम सोलर सिस्टम बोलेंगे उसके पहले से हम सारे मंडल

 

26. शब्द का इस्तेमाल करना जानते थे हमारे हर पूजा में घर में बच्चे के पैदा होने से लेकर अंत्येष्टि के बाद तक ग्रह प्रवेश में हर जगह नो ग्रहण की शांति की पूजा होती है वह चावल का देर लगाते हैं उसमें सुपारी सेट करते हैं वो नो ग्रह बनाते हैं करूं तो प्रॉब्लम कहना की एक बड़ा सा दराज है जिसमें साड़ी जानकारियां हैं उसकी चाबी को दिया हमने तो हम यह बता पाते की हमको पता था की नो ग्रह पर हमको यह नहीं पता की हमको कैसे पता था तो ऐसी बहुत साड़ी चीज कहानी के अंदर और बहुत कुछ ऐसा फिर इनक्रेडिबल इंडिया बोलना है बोलते हैं हम गवर्नमेंट की तरफ से लाइन है सेकंड और

 

27. थर्ड पार्ट में जब आप पहुंचेंगे तो आपको समझ में आएगा की कैलाश पर्वत से लेक और डॉ साउथ कन्याकुमारी तक आपके पास इतनी मिस्टीरियस चीज हैं इस देश में तो मैंने उसमें से नो चीज नो अलग-अलग लोकेशंस को चिन्हित किया है जो की सब सच है बताइए कैलाश पर्वत में अपने आप में बहुत मिस्टीरियस है जैसे कैलाश पर्वत का जो प्लेसमेंट है इन अर्थ वह 66 किलोमीटर है नॉर्थ पोल और 66 * 2 किलोमीटर है तो यह सिर्फ इत्तेफाक नहीं हो सकता इसकी पूजा करने वाले सिर्फ हिंदू नहीं जैन है बुद्ध है और चाइनीस लोग अलग-अलग नाम दे रखा है की वहां कितने सारे पर्वतारोही आज तक

 

28. कोशिश की चढ़ना की तो माउंट एवरेस्ट से ऊंचा है उसे पर चढ़ गए हैं इस पे नहीं चढ़ का रहे हैं ये इसको जीत ही नहीं का रहे हैं ये इतना प्रख्यात है की आप वापस में मार्बल पे आपको लेक जा रहा हूं एक फिल्म आई थी ब्लैक पैंथर उसमें ब्लैक पैंथर का जो हीरो है जिनके डेथ हो गई वो जब पहले बार अपना वर्थ प्रूफ करने के लिए फाइट करते हैं तो सामने काबिले का जो लड़ने आता है वैसे करके बोलना है ग्लोरी तू हनुमान ना जाए पूरा कैलाश पर्वत में माना जाता है जहां हनुमान भी रहते हैं ये सातों चिरंजीवी वहां रहते हैं जब जरूर पड़ती तब आते हैं तो यह सब है इस को दूसरे समुदाय के लोग शांग्रीला कहते हैं .

 

29. और भी नाम है इसके हम ज्ञानगंज कहते हैं लिखा हुआ है हमारे टेक्स्ट में तो उसको मॉडिफाई करके बाकी लोग हमको बता रहे पर हम अपने बच्चों को अपने लोगों को नहीं रही है वहां पर कंकाल मिलते हैं उसकी पूजा होती है और नीचे जाइए हां कुलधारा चाहिए राजस्थान में गोष्ट विलेज है और नीचे मेरी बदनामस्वामी टेंपल तक आप जाइए भीमकुंड है मध्य प्रदेश में कमल की जगह कहां से उसमें इतना पानी है पानी खराब कैसे नहीं होता है जब भी कुछ नेचुरल कैलेमिटी आना आने वाली होती है उसका पानी बहुत ऊपर बाढ़ जाता है फिर नीचे चला जाता है लेकिन वो उसका समंदर से कोई लिंक नहीं .

 

30. मध्य प्रदेश में लैंडलॉक्ड जगह पे वो क्या है कैसे है नहीं पता महाराष्ट्र टेंपल कैसे बनाया नहीं मुझे लगता है की हम लोग इंडिविजुअल और कलेक्टिवली ये गलती करने के करने लगातार मार्च पर पहुंच गए मून पर पहुंच गए हैं लेकिन अभी तक हम अर्थ के कल भी नहीं पहुंचे हम पत्ता गोभी और चिकन जैसी चीज हैं सिंथेटिक बना रहे हैं जो की एडिबल है लेकिन हमको शहर बनाना नहीं आता है स्विट्ज़रलैंड जान के पहले भारत को देखें तो उसकी भी कोशिश की है लेकिन यह सब कहानी के अंदर ही चल रहे हैं ऐसा अलग से ज्ञान देने वाला कम नहीं है तो इस तरीके की चीज है तो आपने नोबेल लिखा आप स्क्रीनप्ले भी लिख रहे हैं .

 

31. और भी फिल्मों के लिए आपने किया कविताएं भी रचते हैं कर लेट हूं थोड़ी बहुत एक-दो अभी बटन बटन में निकली और भी हैं तो एक कविता सुनाइए बातचीत को यहां पर किताब पर बात कर रहे हैं किताब का नाम डी हिडन हिंदू है आखिरी बार ये सवाल आता है की यह नाम क्यों रखा इम्मोर्टल रख लेते हैं चिरंजीवी रख लेते हैं हिंदू शब्द का इस्तेमाल किया गया [संगीत] सब अपनी अपनी व्याख्याएं लेकिन ले भेज हैं पर ये सवाल जरूर आता है की क्यों तो उसे पर एक अच्छी कविता जो लोगों को काफी पसंद रही है वह है की रुद्राक्ष की माला में भी मैं हूं .

 

32. कृपाण कतर और भला में भी मैं हूं श्वेत भी हूं अशुद्ध भी मैं हूं विरुद्ध भी मैं इतिहास में भा आंसू और खून भी मैं हूं अब जो का के मिलेगा वो सुकून भी मैं हूं की इस धरती का मैं केंद्र बिंदु प्रणाम मैं हिंदू चिता की अग्नि गंगा का पानी कब्र की मिट्टी और लोबान भी मैं पीर फकीर अली वाली सियावर राम का हनुमान भी मैं हूं भोला हूं सरल भी तुम्हारा मित्र भी मैं हूं इस धरती का मैं केंद्र बिंदु प्रणाम मैं हिंदू प्रणाम का स्वभाव भी मैं हूं आक्रमण का गाव भी मैं हूं सहनशील स्थिर और शांत भी मैं हूं देवभूमि भारत का हर प्रांत भी मैं हूं.

 

33. शक्ति भक्ति और ना थकती क्रांति भी मैं हूं तूफान हूं और तूफान से पहले की शांति भी मैं हूं इस धरती का मैं केंद्र बिंदु प्रणाम आपके इस भावपूर्ण और समावेशी इंक्लूसिव मैंने भी तभी तो खूब रिले विलय बन गई होगी जी ठीक-ठाक है भगवान राम लगा दिए होंगे वो मेरी चीज मेरे पास अलग-अलग स्वरूप में आई है अच्छा लगता है और मैं उम्मीद करता हूं की आप इसी तरह से करते रहे और प्रस्तुत करते रहे किताब वाला में यह संवाद का सिलसिला चला रहेगा आप इन किताबें को पढ़िए और बताइए आपकी राय क्या है और अब हम लोग इसको लेकर भी उत्साहित है की साहब धोनी एंटरटेनमेंट फिल्म बना रहा है .

 

34. तो बड़े कैनवस पर बाहुबली जैसा रामायण जैसा कुछ और भी ये यहां तक पहुंचने का सफर में पेंगुइन पब्लिकेशन और प्रभात का बहुत साथ रहा है लेकिन इन दोनों तक पहुंचने में एक शख्स का बहुत बड़ा हाथ है उसका नाम है साहिल शर्मा तो कई लोग मेरे पास भी अभी सवाल आता है की अगर हम ऑथर बन्ना चाहते हैं हम लिख रहे हैं कैसे पहुंचे हैं तो अब हमारे पास भी कलर गया है की हमको भी अब लिटरेरी एजेंट के थ्रू जाना चाहिए सफर आसन हो जाता है और एक बार में लेखन करें एक चीज करेक्ट पब्लिकेशन हाउस के पास पहुंचती है साहिल शर्मा बहुत जरूरी कड़ी रहे हैं

 

35. मेरे इस पूरे सफर के उनके और प्रभात तक मैं नहीं पहुंच पता और अब ये वाली किताब गुजराती में मराठी में तीन साउथ इंडियन लैंग्वेज पंजाबी में यह सब में आने वाले दो-तीन महीने में जाएगी तो ये सब के सूत्र संचालक और सूत्रधार जो है उनका नाम का कितना जरूरी मूल्य है और वो सारे लोग जो आपके सफर में आपके साथ रहे अपना हाथ लगाया उनका जिक्र लगातार होते रहना चाहिए जो सिलसिला है जिसका नाम किताब वाला है ये यूं ही चला रहेगा पढ़ने रहिए पढ़ते रहिए क्योंकि एक आदमी और उसके हाथ में किताब ये उम्मीद से भारी तस्वीर होती है शुक्रिया