1.    हनुमान से मदद मांगे तो हनुमान बोले कि अगर मैं इस युद्ध में उतरूंगा तो धर्म युद्ध हो ही नहीं पाएगा क्योंकि होने के पहले मैं खत्म कर दूंगा इसलिए मैं सीधे-सीधे लेकिन आप मतलब नहीं उतरूंगा सीधे-सीधे पर आप मेरे दरवाजे आए तो मैं आपको खाली हाथ भी नहीं लौटाना चाहता हूं मैं आप आप जिस रथ के सारथी बनेंगे हे कृष्ण मैं उसके ध्वज पर विराजमान हो जाऊंगा तो अर्जुन के ध्वज में थे हनुमान और अर्जुन के सारथी थे कृष्ण अब वह दिन आया जब कर्ण और अर्जुन का युद्ध शुरू हुआ तो कर्ण तीर चलाते थे तो अर्जुन का जो रथ था वह दो-तीन इंच पीछे

 

2.    जाता था और अर्जुन तीर चलाते थे तो कर्ण का रथ 20 फुट पीछे चला जाता था तो भी कृष्ण तारीफ करते थे कण की बोते थे क्या मारा देखो तुम्हारे रथ को पीछे कर दिया अर्जुन और गुस्से में और ताकत तीर निकाल के चलाते थे इस बार और पीछे जब चला फिर दो तीन इंच पीछे हिलते थे तो कृष्ण बोलते थे क्या चलाया तो अर्जुन के साथ रहा है हमेशा से अरुण को अर्जुन को ईर्षा की परेशानी रही दो तीन बार अर्जुन सुन लिए बोले आप पहले डिसाइड कर लीजिए किसके साइड है आप आप मेरा मनोबल तोड़ रहे हैं मैं मारता हूं वो 20 फुट पीछे जाता है वो मारता है मैं 3 इंच हिलता

 

3.    हूं आप तारीफ उसकी कर देते हो तो फिर कृष्ण बोले अरे मूर्ख वो जिस रथ पे का सारथी हूं मैं और जिसके ध्वज पर बैठा है हनुमान उसको तीन इंच हिला रहा है वो अगर सोचो कि हम दोनों इस रात में नहीं आते तो कहां जाते तुम तो बहुत ज्यादा बलशाली है तुमसे और फिर जो भी हुआ गलत धोखे से मार दिया गया जो भी हुआ अब वो कर्ण को धोखे से क्यों मारा गया उसकी भी बैक स्टोरी वो जाता है रामायण में अच्छा तो कर्ण की बैक स्टोरी कर्ण और अर्जुन का संबंध जो है सिर्फ महाभारत से नहीं है कर्ण अर्जुन और कृष्ण इन तीनों का संबंध रामायण से कैसे तो बली बाली राजा बाली और

 

4.    सुग्रीव वह राक्षस राजा बाली नहीं बाली सुग्रीव बाली और सुग्रीव बाली और तो बाली जो था वो बहुत बलशाली था और उसके पास शक्ति ये थी कि जिससे लड़ेगा उसका आधा शक्ति ले लेगा तो उसको हरा पाना इंपॉसिबल था अब राम सीता को ढूंढते ढूंढते सुग्रीव से मिले और उनको सुग्रीव की चिंता दिक्कत पता चली तो बोले ठीक है आप सामने से लड़ मैं पीछे से तीर मार के बाली का वध कर दूंगा यह एकलौती बार ऐसा है जो मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने थोड़ा सा छल किया था कि धोखे से बाली को मारा गया था तो यह बाली मर गया सुग्रीव बने वानरों के राजा फिर वानर सेना ने राम सेतु बना के मदद की राम

 

5.    की फिर राम गए सीता को छुड़ाया रावण मरा रामायण खत्म हो गया राम जब वापस अपने विष्णु अवतार में ऊपर पहुंचे वैकुंठ धाम में हम तो वहां इंद्र और सूर्य आए और बड़े नाराज आए बोले ये फाउल है हम नहीं खेलेंगे हम नहीं खेलेंगे आप आप फाउल करते हैं तो विष्णु जी बोले अरे मतलब अभी तो काम निपटा के रहा हू तुम लोग को क्या हो गया तब विष्णु जी को समझ में आया कि सुग्रीव जो था वह सूर्य का प्लेयर था और बाली जो था इंद्र का प्लेयर था वहां वीडियो गेम चल रहा है और यह तय था कि बाली का जीतना तो तय बाली का तो कोई हरा नहीं सकता लेकिन विष्णु अवता राम बीच में

 

6.    आए और पूरा टेबल स्टर्न हो गया कि जिसका जीतना तय था वह हार गया जिसका हारना तय था वह जीत गया तो सूर्य हार गए और इंद्र जीत गए ऊपर तो विष्णु जी को जब समझ में आया कि यार कुछ और करने जा रहे थे कुछ और गड़बड़ कराया तो बोले कोई बात नहीं अगली बार जब जाऊंगा ना तो मैं उसको बैलेंस आउट कर दूंगा अगली बार विष्णु आए कृष्ण अवतार में इंद्र पुत्र अर्जुन का साथ देकर सूर्य पुत्र कर्ण को हरा के उनका मैटर इक्लाइम्स तो मोटिवेशन लेवल बढ़ा हुआ पहुंचे कुंती को जब देखे तो युधिष्ठिर बोले कि आप क्यों दुखित है आपके पांचों पांडव जीवित हैं सुरक्षित हैं और सबसे

 

7.    कठिन जिसको हराना था दो तीन लोग थे जो सबसे कठिन थे विष पितामह द्रोणाचार्य कर्ण अश्वथामा ये दो चार लोग थे जिनको लगभग कृपाचार्य ये लोग असंभव थे हरवा तो बोले आप क्यों दुखी हैं आपको तो खुश होना चाहिए उस दिन कुंती बताई कि वो तुम्हारा वो मेरा जेष्ठ पुत्र था तुम पांचों भाईयो हो बड़ा भाई था तब युधिष्ठिर युधिष्ठिर क्योंकि झूठ नहीं बोलते थे है ना धर्मराज युधिष्ठिर थे तो उनकी वाणी में भी बहुत शक्ति थी वो जो बोल देते थे वो हो जाता था तब वह नाराजगी से यह कुंती को अपनी मां को श्राप दिए थे बो लेते कि आज के बाद भारत भूमि में कोई भी महिला कोई भी बात अपने पेट में नहीं रख पाएगी