आर्टिकल 370 का गेम ओवर अमित शाह का वो ऐतिहासिक ऐलान, जिसे 4 साल बाद सुप्रीम कोर्ट से मिली वैधता Sushant Sinha
- नमस्कार
बॉस बहुत स्वागत
आप सभी का मैं
हूं सुशांत सिन्हा
इस वक्त देश
के लिए बड़ी और
अच्छी खबर जो है
वह सुप्रीम कोर्ट
से आई है भले
कुछ पॉलिटिकल पार्टीज
और उनकी जो
चिंदी मीडिया है
वो पीट रहे होंगे
उनके आंसू निकल
रहे होंगे क्योंकि
अभी वह इस सदमे
से इस दुख से
ही नहीं निकल
पाए कि नरेंद्र मोदी
तो भाई मध्य प्रदेश
राजस्थान छत्तीसगढ़ में
भी💬 उनकी लहर
दिख गई यह तो
2024 में भी आते दिख
रहे हैं अभी वही
दुख कम नहीं हुआ
था कि एक और
दुख की खबर उनके
लिए जो है वह
सुप्रीम कोर्ट से
आई और वह सुप्रीम
कोर्ट का फैसला जो
है वह यह कह
-
- Ø रहा
है कि भाई आर्टिकल
370 हमेशा के लिए खत्म
मोदी सरकार ने
इसे खत्म किया
था सुप्रीम कोर्ट
कुछ लोग दौड़े दौड़े
गए कि सर देखिए
खत्म कर दिया यह
तो मोदी जी
ने देश में कानून
का राज ही नहीं
माना वगैरह वगैरह
10 चीजें मैं आज आपको
इस वीडियो के
अंदर एकएक डिटेल
बताऊंगा कि सुप्रीम
कोर्ट ने क्या कहा
है क्या उसका
मतलब है और क्यों
मैं कह रहा हूं
कि मोदी विरोधियों
को सुप्रीम कोर्ट
का यह फैसला जो
है वो क्यों सोने
नहीं देगा आज
आपको यह वीडियो आखिर
तक देखना चाहिए
-
- Ø साथ
देश को सच बताते
हैं हम चिंदी
मीडिया की तरह
नरेंद्र मोदी के
विरोध के नाम पर
देश विरोधी नहीं
है तो सबसे पहले
आपको बता दूं कि
बड़ी खबर क्या है
ये जो फैसला आया
वो डी वाई चंद्रचूड़
जस्टिस डी वाई
चंद्रचूर जो कि
चीफ जस्टिस है
इंडिया के उनके
साथ पांच जजेस
की बेंच ने
सुनाया और सबसे
महत्त्वपूर्ण लाइन पहले
आपको बता रहा हूं
कि हम संविधान के
आर्टिकल 370 को हटाने
के लिए राष्ट्रपति
की तरफ से संविधानिक
आदेश जारी करने
की शक्ति के
इस्तेमाल को वैद
ठहराते हैं हम
निर्देश देते हैं
कि भारत को
चुनाव आयोग का
चुनाव आयोग 30 सितंबर
20224 तक जम्मू कश्मीर
के
-
- Ø विधानसभा
के चुनाव कराने
के लिए कदम उठाए
यानी देश की सुप्रीम
अदालत ने अनुच्छेद 370 को
हटाने के फैसले को
वैध माना है
हमेशा के लिए फैसला
अब सुपुर्द खाक
हो गया है कब्र
में चला गया है
और वहां से
फिर ऊपर जन्नत में
जाएगा दोजख में
जाएगा 72 रे पाएगा
यह फैसला मुझे
नहीं पता लेकिन मैं
इतना जरूर जानता
हूं कि अब जितना
को छाती पीट
है वो पीट ले
यह 370 तो वापस
नहीं आने जा रहा
और इस फैसले में
और बहुत अहम
बातें कही गई है
लेकिन पहले आपको
एक एक करके डिटेल
बताता हूं एक तो
जस्टिस डी वाई
चंद्रचूर थे इस
बेंच के अंदर इसके
अलावा जस्टिस संजय
किशन कॉल वो इस
इस बेंच में
-
- Ø थे
जस्टिस संजीव खन्ना
इसमें थे इसके अलावा
जस्टिस बी आर
गवाई वो इस बेंच
में शामिल थे
और जस्टिस सूर्यकांत
उनको भी इस बेंच
में रखा गया था
तो पांच जजेस
की बेंच ने
मिलकर यह फ फैसला
सुनाया है सिर्फ
ऐसा नहीं है
कि भाई एक बेंच
में एक आदमी ने
ऐसा कह दिया इसके
बाद आप देखिए याचिका
कर्ताओं के वकील
कौन थे आपको यह
भी पता होना चाहिए
इसमें प्रमुख नाम
है कपिल सिब्बल
साहब का तो आप
समझ सकते हैं
कि याचिकाकर्ताओं के
वकील में अगर कपिल
सिब्बल साहब हैं
तो फिर ये दुख
दर्द सारी बातें
कहां से आ रही
होंगी गोपाल सुब्रह्मण्यम
एक वकील थे
16 वकील इसमें
-
- Ø लगे
हुए थे सरकार की
तरफ से अटॉर्नी जनरल
आर वेंकट रमण
वेंकट रमणी सॉलिसिटर
जनरल तुषार मेहता
पांच सरकारी वकील
थे सरकार के
समर्थक वकीलों में
हरीश सालवे राकेश
द्विवेदी और सात
वकील ये भी थे
यानी जबरदस्त सुनवाई
हुई है इधर भी
पूरा फुल्ली लोडेड
बड़े-बड़े वकील
और इधर भी सरकार
की तरफ से भी
बड़े-बड़े वकील
लगाए गए थे जो
याचिका करता थे
उसमें पूर्व एयर
वाइस मार्शल कपिल
काक भी शामिल थे
हिंडालकर तैयब जी
पूर्व आईएस शामिल
थे सेवा निवृत
मेजर जनरल अशोक
मेहता शामिल थे
और दूसरे दूसरे
लोग शामिल थे
तो कई ऐसे लोग
जिनका कोई बहुत लेना
देना नहीं लेकिन
वो भी
- Ø इसमें
शामिल हो गए थे
याचिका डालने में
खैर अब सुप्रीम कोर्ट
ने क्याक कहा
इसकी पूरी डिटेल
आपको बताने के
पहले आपको समझाता
हूं कि इसको लेकर
कोर्ट में बहस क्या
चली और सरकार ने
क्या पक्ष रखा
था फिर आपको बताऊंगा
इन सारी बातों
पर सुप्रीम कोर्ट
ने क्या कहा
है आपको यह
भी जानना चाहिए
सबसे पहले देखिए
कि पांच तर्क
दिए गए थे जो
याचिका करता थे
उनकी तरफ से कि
भाई 370 हटाना क्यों
ठीक नहीं है
पहला तर्क ये
दिया गया कि राष्ट्रपति
शासन का इस्तेमाल संविधान
बदलने के लिए किया
ही नहीं जा
सकता यह याचिकाकर्ताओं
की तरफ से कहा
गया था कि भाई
आप राष्ट्रपति शासन
लगा हुआ है
-
- Ø उसमें
आप जो राज्य का
संविधान है वो
कैसे बदल सकते हैं
या आप देश का
संविधान माफ कीजिएगा
कैसे बदल सकते हैं
तो उन्होंने कहा
कि भाई आर्टिकल 356 के
तहत आपातकालीन स्थिति
में राष्ट्रपति शासन
राज्य में लोकतांत्रिक
और संवैधानिक सरकार
बनाने के लिए लगाया
जाता है इसका इस्तेमाल
संविधान बदलने के
लिए नहीं किया
जा सकता है
क्योंकि उस वक्त
चुनी हुई सरकार वहां
पर नहीं थी
राष्ट्रपति शासन जम्मू
कश्मीर में लगा
हुआ था तो सरकार
सरकार की तरफ से
जवाब यह दिया गया
था कि शासन व्यवस्था
ठीक से चलाने के
लिए संविधान और
कानून के आधार पर
राष्ट्रपति शासन लगाए
गए इसके लिए
संसद के
-
- Ø दोनों
सदनों में आर्टिक 356 के
जरिए प्रस्ताव पास
किया गया यानी सरकार
ने कहा कि भाई
हमने वहां पर
सब कुछ ठीक से
चले इसीलिए तो
राष्ट्रपति शासन लगाया
दोनों सदनों से
पास कराया उसके
बाद इसको किया
जा सकता है
अब इस पर कोर्ट
ने क्या कहा
वो अभी आपको आगे
बताऊंगा पहले याचिका
करता और सरकार की
बातें सुन लीजिए फिर
याचिका कर्ताओं ने
एक तर्क दिया
था कि आर्टिकल 370 में
संशोधन के लिए
चुनी हुई सरकार की
सहमति जरूरी है
इनका कहना था
कि यह जो 370 था
संविधान सभा जो
उस वक्त बनी
थी उसमें यह
कहा गया था कि
दिसंबर 2018 से अक्टूबर
2019 तक राज्य में
राष्ट्रपति शासन लगा
-
-
- Ø हुआ
था तो सभी फैसले
राज्यपाल ले रहे
थे राज्यपाल केवल
राष्ट्रपति के प्रतिनिधि
होते हैं जो आपातकालीन
स्थिति में चुनी
हुई सरकार की
जगह लेते हैं
मतलब वो चुनी हुई
सरकार नहीं है
इस फैसले को
जम्मू कश्मीर की
जनता और वहां की
चुनी हुई सरकार का
समर्थन नहीं है
ऐसे में बिना विधानसभा
की सिफारिश से
यह कानून नहीं
बन सकता यह
इनका तर्क था
अब इस पर कोर्ट
ने बड़ी इंपॉर्टेंट
बात कही है वो
भी आपको बताऊंगा
लेकिन पहले सुनिए
सरकार ने इस पर
क्या जवाब दिया
था सरकार ने
कहा कि कानून बनाए
जाने के वक्त जब
जम्मू कश्मीर में
राष्ट्रपति शासन था
इसलिए संसद के
पास
-
- Ø राज्य
के विधान मंडल
की शक्तियां थी
अनुच्छेद 356 बी के
मुताबिक संसद ने
अपने कानूनी शक्तियों
का इस्तेमाल करके
ही आर्टिकल 370 में
बदलाव कि यानी सरकार
ने कहा कि भाई
जब वहां राष्ट्रपति
शासन लगाया तो
सारी शक्तियां जो
है वो केंद्र के
पास थी संसद के
पास थी तो हमने
उसी शक्ति का
इस्तेमाल किया तीसरा
तर्क दिया गया
था कि संविधान सभा
खत्म होने के
बाद राष्ट्रपति आदेश
जारी नहीं कर
सकते इसके तर्क
में सरकार ने
जवाब दिया था
कि आर्टिकल 370 एव
डी के तहत राज्य
में छह बार राष्ट्रपति
शासन लगाए गए
एक बार भी इसे
चुनौती नहीं दी
गई है इस कानून
का इस्तेमाल इसलिए
किया
-
- Ø गया
क्योंकि राज्य में
विधानसभा और राज्य
सरकार अस्तित्व में
नहीं थी तो केंद्र
का तर्क ये
था कि इसके पहले
भी वहां पर
राष्ट्रपति शासन लगा
छह बार अगर राष्ट्रपति
कुछ कर ही नहीं
सकते थे तो पहले
ही आप कूदते कि
भाई राष्ट्रपति शासन
क्यों लगा छह बार
इस बार हम कर
रहे हैं तो आपको
दिक्कत हो रही
है इस पर सुप्रीम
कोर्ट ने क्या कहा
ये अभी आने वाला
है चौथा तर्क
इन लोगों ने
दिया कि राज्य को
केंद्र शासित प्रदेश
बनाना संविधान के
आर्टिकल ती का
उल्लंघन है कि
भाई आपने इनको
यूनियन टेरिटरी कैसे
बना दिया इस
पर सरकार का
मोदी सरकार का
जवाब था कि
- Ø आर्टिकल
तीन राज्य और
केंद्र शासित प्रदेश
दोनों के संदर्भ में
ऐसे में केंद्र वास्तव
में एक राज्य को
दो केंद्र शासित
प्रदेशों में बांट
सकता है यानी हमारे
पास अधिकार है
और हम ऐसा कर
सकते हैं इस पर
भी सुप्रीम कोर्ट
ने कहा है यह
भी आगे बताऊंगा और
पांचवा इन लोगों
का तर्क था
याचिका कर्ताओं का
कि राजियो के
स्वरूप बदलने के
लिए केंद्र के
फैसले से आर्टिकल 147 का
उल्लंघन हो रहा
है इनका कहना
कि आर्टिकल 147 जो
है इसमें बताया
गया कि आर्टिकल तीन
और पाच में सीमित
संशोधन हो सकते
हैं जम्मू कश्मीर
और भारत के
संविधान एक दूसरे
से अलग और स्वतंत्र
थे ऐसे में
-
- Ø वहां
के संविधान को
ऐसे ही नहीं बदला
जा सकता इस
पर सरकार ने
जवाब दिया था
कि संविधान का
आर्टिकल 147 किसी भी
तरह से भारतीय संविधान
के आर्टिकल 370 के
तहत भारत के
राष्ट्रपति को दी
जाने वाली शक्तियों
को प्रभावित नहीं
कर सकता इसी
तरह भारत के
संविधान का कोई
कानून संसद को
बाधित नहीं कर
सकता है यानी सरकार
का मोदी सरकार
का तक था कि
भाई आप जम्मू कश्मीर
का कोई संविधान होगा
लेकिन अगर आर्टिकल 370 संविधान
के अंदर मौजूद
है तो वोह संविधान
जो है वो देश
के संविधान को
थोड़ी रोक देगा कि
आप इसको नहीं
बदल सकते अब
इस पर सुप्रीम कोर्ट
ने क्या कहा
है यह बड़ा
-
- Ø इंपॉर्टेंट
हो जाता है
आपको अब आपको यह
पांच तर्क थे
याचिकाकर्ताओं ने क्या
कहा केंद्र सरकार
ने क्या कहा
आपने सुन लिया अब
इस पर सुप्रीम कोर्ट
की बड़ी-बड़ी
बातें सुनिए फिर
इसकी डिटेलिंग में
जाऊंगा चीफ जस्टिस
ने बड़ी बातें
क्या कही पॉइंट नंबर
वन सुप्रीम कोर्ट
ने चीफ जस्टिस ने
पहली बड़ी बात
कही कि जम्मू कश्मीर
के पास भारत में
विलय के बाद आंतरिक
संप्रभुता का अधिकार
नहीं रह यानी चीफ
जस्टिस ने पहली
बड़ी बात तो यही
कह दी कि भाई
आप एक बार इसमें
शामिल हो गए आपने
एक्सेशन पर साइन
कर दिया उसके
बाद आप कहे कि
हम स्वतंत्र हैं
हमारा अपना हिसाब
-
- Ø चलेगा
बस ऐसा नहीं हो
सकता आप कह रहे
हम शादी भी
कर लिए लेकिन हमारा
जो है वो अपना
हिसाब चलेगा हम
अपना घर चलाएंगे हम
किसी से भी रिश्ता
रखेंगे हम कहीं
भी ऐसा नहीं हो
जब आप शादी कर
लिए तो आपको उस
बंधन में रहना पड़ेगा
फिर पिछला घर
जो है पिछला पति
है पिछला बॉयफ्रेंड
जो भी है सब
छोड़ के आना पड़ेगा
यह नहीं होगा
कि य शादी भी
करके रह रहे और
वहां भी चीज चलती
रहे मैं आपको उदाहरण
दे रहा हूं य
कोर्ट नहीं कहा
लेकिन कोर्ट के
कहने का मतलब था
कि एक बार जम्मू
कश्मीर आ गया
भारत के साथ और
आपने साइन कर
दिए तो उसके बाद
आपकी कोई संप्रभुता नहीं
बची बस आप आप
भारत के साथ
-
- Ø है
भारत की संप्रभुता की
बात होगी मैं
आपको सुनाता हूं
चीफ जस्टिस का
वो बयान फिर
आगे की बात बताता
हूं कश्मीर रिटेन
एन एलिमेंट ऑफ
सोवन और इंटरनल सेंटी
न इट जॉइन द
यूनियन ऑफ इंडिया
वी हैव हेल्ड ट
द स्टेट ऑफ
जम्मू एंड कश्मीर डिड
नॉट रिटेन एन
एलिमेंट ऑफ सोरेंटी
न इट जॉइन द
यूनियन ऑफ इंडिया
सुना आपने यानी
चीफ जस्टिस ने
साफसाफ कहा कि
जब जम्मू कश्मीर
भारत के साथ आ
गया तो आपकी अपनी
कोई निजी स्वतंत्रता
नहीं है अपनी निजी
संप्रभुता नहीं है
फिर वो देश की
भारत की बात होग
दूसरा बड़ा पॉइंट
उन्होंने कहा कि
राष्ट्रपति शासन की
घोषणा को चुनौती देना
-
- Ø ही
वैध नहीं तो
जो पॉइंट वो
कह रहे थे और
इसकी डिटेल में
अभी आपको बताऊंगा
कि क्यों यह
सुप्रीम कोर्ट ने
कहा लेकिन जो
याचिका कर्ताओं का
था कि राष्ट्रपति
ऐसा नहीं कर
सकते राष्ट्रपति शासन
नहीं लग सकता उन्होंने
कहा बॉस ऐसा नहीं
है आप राष्ट्रपति
शासन को वैधता की
घोषणा को चुनौती नहीं
दे सकते नंबर
थ्री पॉइंट उन्होंने
कहा अनुच्छेद 370 एक
अस्थाई प्रावधान तो
जो बात केंद्र सरकार
भी कह रही थी
उसको आज सुप्रीम कोर्ट
ने मान लिया कि
370 तो अस्थाई था
इसको आज नहीं तो
कल जाना ही
था यह स्थाई प्रावधान
नहीं था यह बात
बहुत बड़ी बात
आज सुप्रीम कोर्ट
ने कह
- Ø दी
कि 370 अस्थाई ता
नंबर चार संविधान सभा
के भंग होने के
बाद भी राष्ट्रपति
के आदेशों पर
कोई प्रतिबंध नहीं
तो जो याचिकाकर्ताओं
का तर्क था
कि भाई संविधान सभा
भंग हो गई उसके
बाद देश का भारत
का राष्ट्रपति कुछ
नहीं कर सकता जम्मूकश्मीर
के अंदर क्योंकि
जम्मू कश्मीर का
अपना संविधान है
तो आज सुप्रीम कोर्ट
की पांच जजेस
की बेंच ने
कहा कि संविधान सभा
भंग भी हो गई
तो भी राष्ट्रपति
के आदेश प
कोई प्रतिबंध नहीं
है कि राष्ट्रपति
वहां क्या कर
सकता है इसलिए 370 हट
सकता है पॉइंट नंबर
पांच राष्ट्रपति का
शक्ति प्रयोग दुर्भावना
पूर्ण नहीं था
और इसके लिए
- Ø राज्य
से सहमति लेना
जरूरी नहीं यानी
सुप्रीम कोर्ट ने
कहा कि भाई एक
तो होता है
कि आपने कुछ
बदलाव किए क्योंकि आपके
मन में कुछ गलत
है या आपको वहां
कुछ गलत करते दिख
रहे हैं उन्होंने कहा
राष्ट्रपति का फैसला
दुर्भावना पूर्ण नहीं
था जम्मू कश्मीर
भारत का अभिन्न अंग
है और उसको बाकी
राज्यों जैसा बनाया
जाना ही इस फैसले
का एक बड़ा मकसद
था तो इसलिए व
राज्य सरकार के
बिना पूछे आप
ऐसा नहीं कर
सकते यह नहीं चलेगा
यह बात आपकी सही
नहीं नंबर छ
लद्दाख को अलग
केंद्र शासित प्रदेश
बनाना भी वैध है
तो जो लोग याचिका
कर्ताओं की तरफ
से कहा गया था
कि यूनियन टेरिटरी
- Ø नहीं
बना सकती केंद्र
सरकार सुप्रीम कोर्ट
ने वहां भी
इनको एक लपाड़ लगाई
कि बॉस बना सकते
हैं लद्दाख को
यूनियन टेरिटरी और
उसको वैद बताया सातवा
जम्मू कश्मीर को
राज्य का दर्जा बहाल
करके जल्द से
जल्द चुनाव यानी
सुप्रीम कोर्ट ने
कहा कि भाई केंद्र
तो खुद ही कह
रहा है कि हम
हम यहां पर
जल्दी से जल्दी जम्मू
कश्मीर को राज्य
बना देंगे वहां
चुनाव करा देंगे यूनियन
टेरिटरी हमेशा के
लिए तो रहना नहीं
है तो उसके लिए
तो उस पर बात
ही नहीं हो
सकती कि उनको यूनियन
टेरिटरी बनाना सही
है या नहीं है
तो उन्होंने कहा
कि भाई आप इस
पर जल्दी
- Ø से
जल्दी चुनाव करा
लीजिए और उसके लिए
एक डेट अब इन
फैसलों की थोड़ी
डिटेलिंग भी आपको
बताता हूं ताकि कल
को आपको कोई
आके कहे कि नहीं
ऐसा नहीं वैसा
नहीं तो आपको एक
एक चीज जानकारी रहनी
चाहिए एक बड़ी बात
जब राज राज्य राष्ट्रपति
शासन के अधीन हो
तो संघ के हर
निर्णय को चुनौती
नहीं दी जा सकती
ये आज सुप्रीम कोर्ट
ने कहा अदालत ने
माना कि जब राष्ट्रपति
शासन की घोषणा लागू
होती है तो संघ
और राज्यों की
शक्तियों पर सीमाएं
होती है इसमें कहा
गया कि संघ की
शक्ति का दायरा परिस्थितियों
पर निर्भर करता
है अदालत ने
कहा कि अनुच्छेद 356 के
तहत
- Ø शक्ति
के प्रयोग का
उद्घोषणा के उद्देश्य
के साथ उचित संबंध
होना चाहिए इसके
अलावा अदालत ने
कहा कि राज्यों की
ओर से संघ द्वारा
अनगिनत निर्णय लिए
गए इस प्रकार इसमें
कहा गया कि राष्ट्रपति
शासन के दौरान राज्य
की ओर से संघ
द्वारा लिए गए
हर फैसले को
चुनौती नहीं दी
जा सकती इस
तरह से राज्य का
प्रशासन ठप हो
जाएगा यानी सुप्रीम
कोर्ट ने साफसाफ कहा
कि भाई केंद्र के
पास यह अधिकार है
कि वोह फैसले लेगा
राष्ट्रपति शासन लगने
के बाद और ऐसा
नहीं ले भाई राष्ट्रपति
शासन लगा हुआ है
आप कह रहे केंद्र
कोई फैसला ही
नहीं लेगा तो
राज्य के ठप बैठा
रहेगा तो राष्ट्रपति
- Ø शासन
लगा किस लिए तो
इसलिए सुप्रीम कोर्ट
ने इस दलील को
खारिज करते हुए
यह बड़ी बात
कही है इसके अलावा
उन्होंने कहा कि
जब जम्मू कश्मीर
भारत में शामिल हुआ
तो उसमें संप्रभुता
का कोई तत्व बरकरार
नहीं रखा गया जो
मैंने आपको पॉइंट
बताया अदालत ने
कहा कि महाराजा की
उद्घोषणा में कहा
गया कि भारत का
संविधान खत्म हो
जाए इसके साथ
ही कोर्ट ने
कहा कि इंस्ट्रूमेंट
ऑफ एक्सेशन के
पैराग्राफ का अस्तित्व
खत्म हो गया है
अदालत ने कहा कि
संवैधानिक व्यवस्था यह
संकेत नहीं देती
कि जम्मू कश्मीर
ने संप्रभुता बरकरार
रखी यानी ऐसा
कुछ भी नहीं दिखता
कि भाई जम्मू कश्मीर
जो
- Ø है
उसकी अपनी स्वतंत्रता
है और इसीलिए उन्होंने
कहा कि भारत का
अभिन्न अंग राज्य
जम्मू कश्मीर राज्य
भारत का अभिन अंग
बन गया यह भारत
के संविधान के
अनुच्छेद एक और
370 से स्पष्ट है
चीफ जस्टिस ने
कहा कि देश के
सभी राज्यों के
पास विधायक और
कार्यकारी शक्ति है
भले ही अलग-अलग
डिग्री की हो
अनुच्छेद 371 ए और
371 ज विभिन्न राज्यों
के लिए विशेष व्यवस्था
के उदाहरण है
यह असीमित संघवाद
का एक उदाहरण है
इसमें कहा गया है
कि अनुच्छेद 370 असीमित
संघवाद की विशेषता
थी ना कि संप्रभुता
की यानी जैसे
अगर आप नॉर्थ ईस्ट
के कुछ राज्यों में
देखेंगे या
- Ø दूसरी
जगह देखेंगे वहां
371 ए है 300 जे तो
सुप्रीम कोर्ट का
यह कहना है
कि यह अगर अलग-अलग
शक्तियां मिली हुई
है तो इसका मतलब
यह नहीं है
कि भाई यह सब
अपने अपने अलग-अलग
देश हो गए इनकी
अपनी संप्रभुता हो
यह तो लोकतंत्र का
हिस्सा है अनुच्छेद
370 अस्थाई प्रावधान इसको
भी सुप्रीम कोर्ट
ने क्लियर कर
दिया कि भाई यह
अस्थाई था और
राष्ट्रपति की अधिसूचना
जारी करने की
शक्ति 370 का अस्तित्व
समाप्त होने के
साथ समाप्त नहीं
हो जाती पांचवी
बड़ी बात उन्होंने कही
कि अनुच्छेद 370 एक
डी द्वारा भारत
के संविधान के
सभी प्रावधानों को
जम्मू कश्मीर में
लागू करने
- Ø के
लिए राज्य सरकार
की सहमति की
कोई आवश्यकता नहीं
और उन्होंने कहा
कि भाई लगातार ऐसा
नहीं कि अचानक से
कुछ हो गया उन्होंने
कहा कि जब से
जम्मू कश्मीर शामिल
हुआ धीरे-धीरे
भारतीय संविधान की
चीजें वहां पर
हो रही थी और
उसी का एक पार्ट
था कि भाई 370 जो
परमानेंट नहीं था
उसको हटा दिया गया
उसी को आगे बढ़ाते
हुए ये माना गया
कि राष्ट्रपति की
शक्ति का प्रयोग वैद
था यानी सुप्रीम
कोर्ट ने एक एक
पक्ष को एक एक
बड़ी-बड़ी बात
को सुनने के
बाद यह फैसला सुनाया
है और आपको थोड़ी
सी हिस्ट्री भी
बताता हूं आपको एक
एक चीज तो पता
चल गई लेकिन आपको
यह भी पता रहना
- Ø चाहिए
कि भाई जब कश्मीर
भारत में नहीं आएगा
जम्मू कश्मीर यह
शुरू में राजा हरि
सिंह ने फैसला लिया
कि ना हम पाकिस्तान
में जाएंगे ना
हम हिंदुस्तान में
जाएंगे तो वहां
1947 में वजीरिस्तान से
10000 कबाइली ने जम्मू
कश्मीर पर हमला
कर दिया और
उसी दौरान विलय
के लिए हरि सिंह
ने साइन किया
और तब विदेश संचार
और रक्षा के
मामले में कानून बनाने
का अधिकार भारतीय
संसद को दे दिया
गया था 17 अक्टूबर 1949 को
आर्टिकल 370 भारतीय संविधान
का हिस्सा बन
गया इसके तहत
जम्मू कश्मीर को
विशेष राज्य का
दर्जा देने की
बात कही गई थी
दो साल बाद उसके
बाद आप
- Ø देखिए
1951 में जम्मू कश्मीर
से जुड़े मामलों
में कानून बनाने
के लिए संविधान सभा
बनी जनवरी 1957 में
अपना संविधान लागू
होते ही संविधान सभा
भंग हो गई और
जम्मू कश्मीर के
संविधान सभा ने
आर्टिकल 370 में किसी
तरह के कोई बदलाव
नहीं किए थे और
इसके लिए दो तर्क
यह दिया जाता
है कि भाई जब
संविधान सभा भंग
होने पर यह कानून
अस्थाई हो गया
और द कानून स्थाई
हो गया दूसरा तर्क
यह दिया जाता
है कि भाई ये
तो अस्थाई हिस्से
में था इसलिए जो
है यह अपने आप
खत्म कोर्ट ने
आज दोनों चीजें
स्पष्ट कर दी
कि अपने आप
खत्म हो गया यह
भी नहीं माना
जाना चाहिए और
यह स्थाई तो
था ही
- Ø नहीं
यह अस्थाई था
यह भी आज कोर्ट
ने स्पष्ट कर
दिया यानी 300 आर्टिकल
370 जो है वह अब
सुपुर्द खाक हो
गया अब वह खत्म
हो गया लेकिन मैं
चाहता हूं कि जब
यह पूरा मसला
आज कोर्ट में
खत्म हो गया फिर
भी कुछ लोग होंगे
जो इसे आपके दिलो
दिमाग में खत्म नहीं
होने आज जम्मू कश्मीर
के अंदर 5जी
पहुंच गया जो 5जी
हम और आप इस्तेमाल
करते हैं देश के
अलग अलग हिस्सों में
वह जम्मू कश्मीर
में भी लोग इस्तेमाल
कर और जब जम्मू
कश्मीर में स्थिति
ना बगड़ बिग
पाकिस्तान वहां पर
तमाशा ना खड़ा कर
दे हंगामा ना
कर खड़ा कर
दे इसके लिए
कुछ महीनों के
लिए इंटरनेट
- Ø बंद
हुआ था तो लोगों
ने छाती पीट
आज जब चीजें ठीक
हो गई और वहां
5जी पहुंच गया
है तो लोग कुछ
बोलने को तैयार नहीं
आज जम्मू कश्मीर
में जब विकास हो
रहा है बड़े-बड़े
प्रोजेक्ट पहुंच रहे
हैं बड़े-बड़े
प्रोजेक्ट केंद्र बना
रहा है भर भर
के पैसा दे
रहा है तब वो
लोग कहां गायब
हो गए हैं जो
इस 370 के हटने
पर छाती पीट
रहे दरअसल 370 के
हटने पर छाती पीटने
वाला हर शख्स वो
था जिसके सीने
के अंदर भारत
है ही नहीं उनका
अपना एजेंडा वह
परिवार थे जिनके
खुद के बच्चे विदेश
में पड़ेंगे और
आपके बच्चे से
वह हाथ में पत्थर
देकर फेंकते थे
या अगर
- Ø आपका
बच्चा पत्थर फेंके
तो उसको कोई
दिक्कत भी नहीं
थी और वह पत्थर
फेंकने वालों को
कैसे पाकिस्तान से
पैसा आता था यह
भी सबको पता
है कैसे आतंकियों
के जनाजे में
लोग शामिल होते
थे भर भर के
यह भी लोगों को
पता है और आज
वही लोग उनको दिखता
है कि कैसे जम्मू
कश्मीर के अंदर
बड़ा बदलाव हुआ
और जम्मू कश्मीर
आज वैसा बन
रहा है जैसा देश
का दूसरा हिस्सा
भी पर्यटन भाई
साहब रिकॉर्ड तोड़
टूरिस्ट आ रहे
व रिकॉर्ड तोड़
और इस 370 को लेकर
क्या तमाशा नहीं
किया गया आज हर
कश्मीरी को पता
है कि जो कश्मीर
उन्होंने देखा था
पिछले 60 70 सालों में
और जो कश्मीर अब
बनकर तैयार हुआ
- Ø है
और हो रहा है
उसमें जमीन आसमान
मान का फर्क है
और इसलिए आप
देखिएगा शैला रशीद
जैसे कई लोग जो
लोग पहले इसका
विरोध करते थे
आज उनमें कुछ
बदलाव दिखता है
कुछ लोगों की
बुद्धि सुधरी है
कुछ की अभी भी
नहीं सुधरेगी क्योंकि
वह नरेंद्र मोदी
के विरोध में
यह मानसिक संतुलन
खो बैठे और
204 में भी अगर नरेंद्र
मोदी आ गए तो
मुझे तो लगता है
कि इन लोगों को
मानसिक इलाज की
जरूरत पड़ेगी हालांकि
अभी भी कुछ लोगों
को लगता है
लेकिन इन लोगों को
वाकई में भर्ती होकर
इलाज कराना पड़ेगा
ऐसी स्थि लेकिन
अच्छी बात यह है
कि इन लोगों के
साथ से इनके दिमाग
से यह चीजें नहीं
- Ø चलती
यह देश नहीं चलता
और सुप्रीम कोर्ट
ने भी आप साफ
कर दिया है
कि आर्टिकल 370 जो
है वह हमेशा हमेशा
के लिए खत्म हो
गया आज हर भारतीय
के लिए गर्व का
दिन है खुश होने
का दिन है और
अगर आप इस फैसले
पर अपनी कोई
राय रखना चाहते
हैं तो कमेंट बॉक्स
में लिखकर जरूर
बताइएगा वीडियो को
लाइक और शेयर कीजिएगा
शाम तक हो सकता
है कि जजमेंट की
पूरी डिटेल आ
जाएगी तो न्यूज की
पाठशाला में और
विस्तार से आपको
यह बातें बताऊंगा
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