• नमस्कार बॉस बहुत स्वागत आप सभी का मैं हूं सुशांत सिन्हा इस वक्त देश के लिए बड़ी और अच्छी खबर जो है वह सुप्रीम कोर्ट से आई है भले कुछ पॉलिटिकल पार्टीज और उनकी जो चिंदी मीडिया है वो पीट रहे होंगे उनके आंसू निकल रहे होंगे क्योंकि अभी वह इस सदमे से इस दुख से ही नहीं निकल पाए कि नरेंद्र मोदी तो भाई मध्य प्रदेश राजस्थान छत्तीसगढ़ में भी💬 उनकी लहर दिख गई यह तो 2024 में भी आते दिख रहे हैं अभी वही दुख कम नहीं हुआ था कि एक और दुख की खबर उनके लिए जो है वह सुप्रीम कोर्ट से आई और वह सुप्रीम कोर्ट का फैसला जो है वह यह कह
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  • Ø  रहा है कि भाई आर्टिकल 370 हमेशा के लिए खत्म मोदी सरकार ने इसे खत्म किया था सुप्रीम कोर्ट कुछ लोग दौड़े दौड़े गए कि सर देखिए खत्म कर दिया यह तो मोदी जी ने देश में कानून का राज ही नहीं माना वगैरह वगैरह 10 चीजें मैं आज आपको इस वीडियो के अंदर एकएक डिटेल बताऊंगा कि सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा है क्या उसका मतलब है और क्यों मैं कह रहा हूं कि मोदी विरोधियों को सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला जो है वो क्यों सोने नहीं देगा आज आपको यह वीडियो आखिर तक देखना चाहिए 
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  • Ø  साथ देश को सच बताते हैं हम  चिंदी मीडिया की तरह नरेंद्र मोदी के विरोध के नाम पर देश विरोधी नहीं है तो सबसे पहले आपको बता दूं कि बड़ी खबर क्या है ये जो फैसला आया वो डी वाई चंद्रचूड़ जस्टिस डी वाई चंद्रचूर जो कि चीफ जस्टिस है इंडिया के उनके साथ पांच जजेस की बेंच ने सुनाया और सबसे महत्त्वपूर्ण लाइन पहले आपको बता रहा हूं कि हम संविधान के आर्टिकल 370 को हटाने के लिए राष्ट्रपति की तरफ से संविधानिक आदेश जारी करने की शक्ति के इस्तेमाल को वैद ठहराते हैं हम निर्देश देते हैं कि भारत को चुनाव आयोग का चुनाव आयोग 30 सितंबर 20224 तक जम्मू कश्मीर के
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  • Ø  विधानसभा के चुनाव कराने के लिए कदम उठाए यानी देश की सुप्रीम अदालत ने अनुच्छेद 370 को हटाने के फैसले को वैध माना है हमेशा के लिए फैसला अब सुपुर्द खाक हो गया है कब्र में चला गया है और वहां से फिर ऊपर जन्नत में जाएगा दोजख में जाएगा 72 रे पाएगा यह फैसला मुझे नहीं पता लेकिन मैं इतना जरूर जानता हूं कि अब जितना को छाती पीट है वो पीट ले यह 370 तो वापस नहीं आने जा रहा और इस फैसले में और बहुत अहम बातें कही गई है लेकिन पहले आपको एक एक करके डिटेल बताता हूं एक तो जस्टिस डी वाई चंद्रचूर थे इस बेंच के अंदर इसके अलावा जस्टिस संजय किशन कॉल वो इस इस बेंच में
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  • Ø  थे जस्टिस संजीव खन्ना इसमें थे इसके अलावा जस्टिस बी आर गवाई वो इस बेंच में शामिल थे और जस्टिस सूर्यकांत उनको भी इस बेंच में रखा गया था तो पांच जजेस की बेंच ने मिलकर यह फैसला सुनाया है सिर्फ ऐसा नहीं है कि भाई एक बेंच में एक आदमी ने ऐसा कह दिया इसके बाद आप देखिए याचिका कर्ताओं के वकील कौन थे आपको यह भी पता होना चाहिए इसमें प्रमुख नाम है कपिल सिब्बल साहब का तो आप समझ सकते हैं कि याचिकाकर्ताओं के वकील में अगर कपिल सिब्बल साहब हैं तो फिर ये दुख दर्द सारी बातें कहां से रही होंगी गोपाल सुब्रह्मण्यम एक वकील थे 16 वकील इसमें
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  • Ø  लगे हुए थे सरकार की तरफ से अटॉर्नी जनरल आर वेंकट रमण वेंकट रमणी सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पांच सरकारी वकील थे सरकार के समर्थक वकीलों में हरीश सालवे राकेश द्विवेदी और सात वकील ये भी थे यानी जबरदस्त सुनवाई हुई है इधर भी पूरा फुल्ली लोडेड बड़े-बड़े वकील और इधर भी सरकार की तरफ से भी बड़े-बड़े वकील लगाए गए थे जो याचिका करता थे उसमें पूर्व एयर वाइस मार्शल कपिल काक भी शामिल थे हिंडालकर तैयब जी पूर्व आईएस शामिल थे सेवा निवृत मेजर जनरल अशोक मेहता शामिल थे और दूसरे दूसरे लोग शामिल थे तो कई ऐसे लोग जिनका कोई बहुत लेना देना नहीं लेकिन वो भी
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  • Ø  इसमें शामिल हो गए थे याचिका डालने में खैर अब सुप्रीम कोर्ट ने क्याक कहा इसकी पूरी डिटेल आपको बताने के पहले आपको समझाता हूं कि इसको लेकर कोर्ट में बहस क्या चली और सरकार ने क्या पक्ष रखा था फिर आपको बताऊंगा इन सारी बातों पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा है आपको यह भी जानना चाहिए सबसे पहले देखिए कि पांच तर्क दिए गए थे जो याचिका करता थे उनकी तरफ से कि भाई 370 हटाना क्यों ठीक नहीं है पहला तर्क ये दिया गया कि राष्ट्रपति शासन का इस्तेमाल संविधान बदलने के लिए किया ही नहीं जा सकता यह याचिकाकर्ताओं की तरफ से कहा गया था कि भाई आप राष्ट्रपति शासन लगा हुआ है
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  • Ø  उसमें आप जो राज्य का संविधान है वो कैसे बदल सकते हैं या आप देश का संविधान माफ कीजिएगा कैसे बदल सकते हैं तो उन्होंने कहा कि भाई आर्टिकल 356 के तहत आपातकालीन स्थिति में राष्ट्रपति शासन राज्य में लोकतांत्रिक और संवैधानिक सरकार बनाने के लिए लगाया जाता है इसका इस्तेमाल संविधान बदलने के लिए नहीं किया जा सकता है क्योंकि उस वक्त चुनी हुई सरकार वहां पर नहीं थी राष्ट्रपति शासन जम्मू कश्मीर में लगा हुआ था तो सरकार सरकार की तरफ से जवाब यह दिया गया था कि शासन व्यवस्था ठीक से चलाने के लिए संविधान और कानून के आधार पर राष्ट्रपति शासन लगाए गए इसके लिए संसद के
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  • Ø  दोनों सदनों में आर्टिक 356 के जरिए प्रस्ताव पास किया गया यानी सरकार ने कहा कि भाई हमने वहां पर सब कुछ ठीक से चले इसीलिए तो राष्ट्रपति शासन लगाया दोनों सदनों से पास कराया उसके बाद इसको किया जा सकता है अब इस पर कोर्ट ने क्या कहा वो अभी आपको आगे बताऊंगा पहले याचिका करता और सरकार की बातें सुन लीजिए फिर याचिका कर्ताओं ने एक तर्क दिया था कि आर्टिकल 370 में संशोधन के लिए चुनी हुई सरकार की सहमति जरूरी है इनका कहना था कि यह जो 370 था संविधान सभा जो उस वक्त बनी थी उसमें यह कहा गया था कि दिसंबर 2018 से अक्टूबर 2019 तक राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा
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  • Ø  हुआ था तो सभी फैसले राज्यपाल ले रहे थे राज्यपाल केवल राष्ट्रपति के प्रतिनिधि होते हैं जो आपातकालीन स्थिति में चुनी हुई सरकार की जगह लेते हैं मतलब वो चुनी हुई सरकार नहीं है इस फैसले को जम्मू कश्मीर की जनता और वहां की चुनी हुई सरकार का समर्थन नहीं है ऐसे में बिना विधानसभा की सिफारिश से यह कानून नहीं बन सकता यह इनका तर्क था अब इस पर कोर्ट ने बड़ी इंपॉर्टेंट बात कही है वो भी आपको बताऊंगा लेकिन पहले सुनिए सरकार ने इस पर क्या जवाब दिया था सरकार ने कहा कि कानून बनाए जाने के वक्त जब जम्मू कश्मीर में राष्ट्रपति शासन था इसलिए संसद के पास
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  • Ø  राज्य के विधान मंडल की शक्तियां थी अनुच्छेद 356 बी के मुताबिक संसद ने अपने कानूनी शक्तियों का इस्तेमाल करके ही आर्टिकल 370 में बदलाव कि यानी सरकार ने कहा कि भाई जब वहां राष्ट्रपति शासन लगाया तो सारी शक्तियां जो है वो केंद्र के पास थी संसद के पास थी तो हमने उसी शक्ति का इस्तेमाल किया तीसरा तर्क दिया गया था कि संविधान सभा खत्म होने के बाद राष्ट्रपति आदेश जारी नहीं कर सकते इसके तर्क में सरकार ने जवाब दिया था कि आर्टिकल 370 एव डी के तहत राज्य में छह बार राष्ट्रपति शासन लगाए गए एक बार भी इसे चुनौती नहीं दी गई है इस कानून का इस्तेमाल इसलिए किया
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  • Ø  गया क्योंकि राज्य में विधानसभा और राज्य सरकार अस्तित्व में नहीं थी तो केंद्र का तर्क ये था कि इसके पहले भी वहां पर राष्ट्रपति शासन लगा छह बार अगर राष्ट्रपति कुछ कर ही नहीं सकते थे तो पहले ही आप कूदते कि भाई राष्ट्रपति शासन क्यों लगा छह बार इस बार हम कर रहे हैं तो आपको दिक्कत हो रही है इस पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ये अभी आने वाला है चौथा तर्क इन लोगों ने दिया कि राज्य को केंद्र शासित प्रदेश बनाना संविधान के आर्टिकल ती का उल्लंघन है कि भाई आपने इनको यूनियन टेरिटरी कैसे बना दिया इस पर सरकार का मोदी सरकार का जवाब था कि
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  • Ø  आर्टिकल तीन राज्य और केंद्र शासित प्रदेश दोनों के संदर्भ में ऐसे में केंद्र वास्तव में एक राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट सकता है यानी हमारे पास अधिकार है और हम ऐसा कर सकते हैं इस पर भी सुप्रीम कोर्ट ने कहा है यह भी आगे बताऊंगा और पांचवा इन लोगों का तर्क था याचिका कर्ताओं का कि राजियो के स्वरूप बदलने के लिए केंद्र के फैसले से आर्टिकल 147 का उल्लंघन हो रहा है इनका कहना कि आर्टिकल 147 जो है इसमें बताया गया कि आर्टिकल तीन और पाच में सीमित संशोधन हो सकते हैं जम्मू कश्मीर और भारत के संविधान एक दूसरे से अलग और स्वतंत्र थे ऐसे में
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  • Ø  वहां के संविधान को ऐसे ही नहीं बदला जा सकता इस पर सरकार ने जवाब दिया था कि संविधान का आर्टिकल 147 किसी भी तरह से भारतीय संविधान के आर्टिकल 370 के तहत भारत के राष्ट्रपति को दी जाने वाली शक्तियों को प्रभावित नहीं कर सकता इसी तरह भारत के संविधान का कोई कानून संसद को बाधित नहीं कर सकता है यानी सरकार का मोदी सरकार का तक था कि भाई आप जम्मू कश्मीर का कोई संविधान होगा लेकिन अगर आर्टिकल 370 संविधान के अंदर मौजूद है तो वोह संविधान जो है वो देश के संविधान को थोड़ी रोक देगा कि आप इसको नहीं बदल सकते अब इस पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा है यह बड़ा
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  • Ø  इंपॉर्टेंट हो जाता है आपको अब आपको यह पांच तर्क थे याचिकाकर्ताओं ने क्या कहा केंद्र सरकार ने क्या कहा आपने सुन लिया अब इस पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी-बड़ी बातें सुनिए फिर इसकी डिटेलिंग में जाऊंगा चीफ जस्टिस ने बड़ी बातें क्या कही पॉइंट नंबर वन सुप्रीम कोर्ट ने चीफ जस्टिस ने पहली बड़ी बात कही कि जम्मू कश्मीर के पास भारत में विलय के बाद आंतरिक संप्रभुता का अधिकार नहीं रह यानी चीफ जस्टिस ने पहली बड़ी बात तो यही कह दी कि भाई आप एक बार इसमें शामिल हो गए आपने एक्सेशन पर साइन कर दिया उसके बाद आप कहे कि हम स्वतंत्र हैं हमारा अपना हिसाब
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  • Ø  चलेगा बस ऐसा नहीं हो सकता आप कह रहे हम शादी भी कर लिए लेकिन हमारा जो है वो अपना हिसाब चलेगा हम अपना घर चलाएंगे हम किसी से भी रिश्ता रखेंगे हम कहीं भी ऐसा नहीं हो जब आप शादी कर लिए तो आपको उस बंधन में रहना पड़ेगा फिर पिछला घर जो है पिछला पति है पिछला बॉयफ्रेंड जो भी है सब छोड़ के आना पड़ेगा यह नहीं होगा कि शादी भी करके रह रहे और वहां भी चीज चलती रहे मैं आपको उदाहरण दे रहा हूं कोर्ट नहीं कहा लेकिन कोर्ट के कहने का मतलब था कि एक बार जम्मू कश्मीर गया भारत के साथ और आपने साइन कर दिए तो उसके बाद आपकी कोई संप्रभुता नहीं बची बस आप आप भारत के साथ
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  • Ø  है भारत की संप्रभुता की बात होगी मैं आपको सुनाता हूं चीफ जस्टिस का वो बयान फिर आगे की बात बताता हूं कश्मीर रिटेन एन एलिमेंट ऑफ सोवन और इंटरनल सेंटी इट जॉइन यूनियन ऑफ इंडिया वी हैव हेल्ड स्टेट ऑफ जम्मू एंड कश्मीर डिड नॉट रिटेन एन एलिमेंट ऑफ सोरेंटी इट जॉइन यूनियन ऑफ इंडिया सुना आपने यानी चीफ जस्टिस ने साफसाफ कहा कि जब जम्मू कश्मीर भारत के साथ गया तो आपकी अपनी कोई निजी स्वतंत्रता नहीं है अपनी निजी संप्रभुता नहीं है फिर वो देश की भारत की बात होग दूसरा बड़ा पॉइंट उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति शासन की घोषणा को चुनौती देना
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  • Ø  ही वैध नहीं तो जो पॉइंट वो कह रहे थे और इसकी डिटेल में अभी आपको बताऊंगा कि क्यों यह सुप्रीम कोर्ट ने कहा लेकिन जो याचिका कर्ताओं का था कि राष्ट्रपति ऐसा नहीं कर सकते राष्ट्रपति शासन नहीं लग सकता उन्होंने कहा बॉस ऐसा नहीं है आप राष्ट्रपति शासन को वैधता की घोषणा को चुनौती नहीं दे सकते नंबर थ्री पॉइंट उन्होंने कहा अनुच्छेद 370 एक अस्थाई प्रावधान तो जो बात केंद्र सरकार भी कह रही थी उसको आज सुप्रीम कोर्ट ने मान लिया कि 370 तो अस्थाई था इसको आज नहीं तो कल जाना ही था यह स्थाई प्रावधान नहीं था यह बात बहुत बड़ी बात आज सुप्रीम कोर्ट ने कह
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  • Ø  दी कि 370 अस्थाई ता नंबर चार संविधान सभा के भंग होने के बाद भी राष्ट्रपति के आदेशों पर कोई प्रतिबंध नहीं तो जो याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि भाई संविधान सभा भंग हो गई उसके बाद देश का भारत का राष्ट्रपति कुछ नहीं कर सकता जम्मूकश्मीर के अंदर क्योंकि जम्मू कश्मीर का अपना संविधान है तो आज सुप्रीम कोर्ट की पांच जजेस की बेंच ने कहा कि संविधान सभा भंग भी हो गई तो भी राष्ट्रपति के आदेश कोई प्रतिबंध नहीं है कि राष्ट्रपति वहां क्या कर सकता है इसलिए 370 हट सकता है पॉइंट नंबर पांच राष्ट्रपति का शक्ति प्रयोग दुर्भावना पूर्ण नहीं था और इसके लिए
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  • Ø  राज्य से सहमति लेना जरूरी नहीं यानी सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भाई एक तो होता है कि आपने कुछ बदलाव किए क्योंकि आपके मन में कुछ गलत है या आपको वहां कुछ गलत करते दिख रहे हैं उन्होंने कहा राष्ट्रपति का फैसला दुर्भावना पूर्ण नहीं था जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और उसको बाकी राज्यों जैसा बनाया जाना ही इस फैसले का एक बड़ा मकसद था तो इसलिए राज्य सरकार के बिना पूछे आप ऐसा नहीं कर सकते यह नहीं चलेगा यह बात आपकी सही नहीं नंबर लद्दाख को अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाना भी वैध है तो जो लोग याचिका कर्ताओं की तरफ से कहा गया था कि यूनियन टेरिटरी
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  • Ø  नहीं बना सकती केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट ने वहां भी इनको एक लपाड़ लगाई कि बॉस बना सकते हैं लद्दाख को यूनियन टेरिटरी और उसको वैद बताया सातवा जम्मू कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करके जल्द से जल्द चुनाव यानी सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भाई केंद्र तो खुद ही कह रहा है कि हम हम यहां पर जल्दी से जल्दी जम्मू कश्मीर को राज्य बना देंगे वहां चुनाव करा देंगे यूनियन टेरिटरी हमेशा के लिए तो रहना नहीं है तो उसके लिए तो उस पर बात ही नहीं हो सकती कि उनको यूनियन टेरिटरी बनाना सही है या नहीं है तो उन्होंने कहा कि भाई आप इस पर जल्दी
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  • Ø  से जल्दी चुनाव करा लीजिए और उसके लिए एक डेट अब इन फैसलों की थोड़ी डिटेलिंग भी आपको बताता हूं ताकि कल को आपको कोई आके कहे कि नहीं ऐसा नहीं वैसा नहीं तो आपको एक एक चीज जानकारी रहनी चाहिए एक बड़ी बात जब राज राज्य राष्ट्रपति शासन के अधीन हो तो संघ के हर निर्णय को चुनौती नहीं दी जा सकती ये आज सुप्रीम कोर्ट ने कहा अदालत ने माना कि जब राष्ट्रपति शासन की घोषणा लागू होती है तो संघ और राज्यों की शक्तियों पर सीमाएं होती है इसमें कहा गया कि संघ की शक्ति का दायरा परिस्थितियों पर निर्भर करता है अदालत ने कहा कि अनुच्छेद 356 के तहत
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  • Ø  शक्ति के प्रयोग का उद्घोषणा के उद्देश्य के साथ उचित संबंध होना चाहिए इसके अलावा अदालत ने कहा कि राज्यों की ओर से संघ द्वारा अनगिनत निर्णय लिए गए इस प्रकार इसमें कहा गया कि राष्ट्रपति शासन के दौरान राज्य की ओर से संघ द्वारा लिए गए हर फैसले को चुनौती नहीं दी जा सकती इस तरह से राज्य का प्रशासन ठप हो जाएगा यानी सुप्रीम कोर्ट ने साफसाफ कहा कि भाई केंद्र के पास यह अधिकार है कि वोह फैसले लेगा राष्ट्रपति शासन लगने के बाद और ऐसा नहीं ले भाई राष्ट्रपति शासन लगा हुआ है आप कह रहे केंद्र कोई फैसला ही नहीं लेगा तो राज्य के ठप बैठा रहेगा तो राष्ट्रपति
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  • Ø  शासन लगा किस लिए तो इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए यह बड़ी बात कही है इसके अलावा उन्होंने कहा कि जब जम्मू कश्मीर भारत में शामिल हुआ तो उसमें संप्रभुता का कोई तत्व बरकरार नहीं रखा गया जो मैंने आपको पॉइंट बताया अदालत ने कहा कि महाराजा की उद्घोषणा में कहा गया कि भारत का संविधान खत्म हो जाए इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन के पैराग्राफ का अस्तित्व खत्म हो गया है अदालत ने कहा कि संवैधानिक व्यवस्था यह संकेत नहीं देती कि जम्मू कश्मीर ने संप्रभुता बरकरार रखी यानी ऐसा कुछ भी नहीं दिखता कि भाई जम्मू कश्मीर जो
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  • Ø  है उसकी अपनी स्वतंत्रता है और इसीलिए उन्होंने कहा कि भारत का अभिन्न अंग राज्य जम्मू कश्मीर राज्य भारत का अभिन अंग बन गया यह भारत के संविधान के अनुच्छेद एक और 370 से स्पष्ट है चीफ जस्टिस ने कहा कि देश के सभी राज्यों के पास विधायक और कार्यकारी शक्ति है भले ही अलग-अलग डिग्री की हो अनुच्छेद 371 और 371 विभिन्न राज्यों के लिए विशेष व्यवस्था के उदाहरण है यह असीमित संघवाद का एक उदाहरण है इसमें कहा गया है कि अनुच्छेद 370 असीमित संघवाद की विशेषता थी ना कि संप्रभुता की यानी जैसे अगर आप नॉर्थ ईस्ट के कुछ राज्यों में देखेंगे या
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  • Ø  दूसरी जगह देखेंगे वहां 371 है 300 जे तो सुप्रीम कोर्ट का यह कहना है कि यह अगर अलग-अलग शक्तियां मिली हुई है तो इसका मतलब यह नहीं है कि भाई यह सब अपने अपने अलग-अलग देश हो गए इनकी अपनी संप्रभुता हो यह तो लोकतंत्र का हिस्सा है अनुच्छेद 370 अस्थाई प्रावधान इसको भी सुप्रीम कोर्ट ने क्लियर कर दिया कि भाई यह अस्थाई था और राष्ट्रपति की अधिसूचना जारी करने की शक्ति 370 का अस्तित्व समाप्त होने के साथ समाप्त नहीं हो जाती पांचवी बड़ी बात उन्होंने कही कि अनुच्छेद 370 एक डी द्वारा भारत के संविधान के सभी प्रावधानों को जम्मू कश्मीर में लागू करने
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  • Ø  के लिए राज्य सरकार की सहमति की कोई आवश्यकता नहीं और उन्होंने कहा कि भाई लगातार ऐसा नहीं कि अचानक से कुछ हो गया उन्होंने कहा कि जब से जम्मू कश्मीर शामिल हुआ धीरे-धीरे भारतीय संविधान की चीजें वहां पर हो रही थी और उसी का एक पार्ट था कि भाई 370 जो परमानेंट नहीं था उसको हटा दिया गया उसी को आगे बढ़ाते हुए ये माना गया कि राष्ट्रपति की शक्ति का प्रयोग वैद था यानी सुप्रीम कोर्ट ने एक एक पक्ष को एक एक बड़ी-बड़ी बात को सुनने के बाद यह फैसला सुनाया है और आपको थोड़ी सी हिस्ट्री भी बताता हूं आपको एक एक चीज तो पता चल गई लेकिन आपको यह भी पता रहना
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  • Ø  चाहिए कि भाई जब कश्मीर भारत में नहीं आएगा जम्मू कश्मीर यह शुरू में राजा हरि सिंह ने फैसला लिया कि ना हम पाकिस्तान में जाएंगे ना हम हिंदुस्तान में जाएंगे तो वहां 1947 में वजीरिस्तान से 10000 कबाइली ने जम्मू कश्मीर पर हमला कर दिया और उसी दौरान विलय के लिए हरि सिंह ने साइन किया और तब विदेश संचार और रक्षा के मामले में कानून बनाने का अधिकार भारतीय संसद को दे दिया गया था 17 अक्टूबर 1949 को आर्टिकल 370 भारतीय संविधान का हिस्सा बन गया इसके तहत जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने की बात कही गई थी दो साल बाद उसके बाद आप
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  • Ø  देखिए 1951 में जम्मू कश्मीर से जुड़े मामलों में कानून बनाने के लिए संविधान सभा बनी जनवरी 1957 में अपना संविधान लागू होते ही संविधान सभा भंग हो गई और जम्मू कश्मीर के संविधान सभा ने आर्टिकल 370 में किसी तरह के कोई बदलाव नहीं किए थे और इसके लिए दो तर्क यह दिया जाता है कि भाई जब संविधान सभा भंग होने पर यह कानून अस्थाई हो गया और कानून स्थाई हो गया दूसरा तर्क यह दिया जाता है कि भाई ये तो अस्थाई हिस्से में था इसलिए जो है यह अपने आप खत्म कोर्ट ने आज दोनों चीजें स्पष्ट कर दी कि अपने आप खत्म हो गया यह भी नहीं माना जाना चाहिए और यह स्थाई तो था ही
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  • Ø  नहीं यह अस्थाई था यह भी आज कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया यानी 300 आर्टिकल 370 जो है वह अब सुपुर्द खाक हो गया अब वह खत्म हो गया लेकिन मैं चाहता हूं कि जब यह पूरा मसला आज कोर्ट में खत्म हो गया फिर भी कुछ लोग होंगे जो इसे आपके दिलो दिमाग में खत्म नहीं होने आज जम्मू कश्मीर के अंदर 5जी पहुंच गया जो 5जी हम और आप इस्तेमाल करते हैं देश के अलग अलग हिस्सों में वह जम्मू कश्मीर में भी लोग इस्तेमाल कर और जब जम्मू कश्मीर में स्थिति ना बगड़ बिग पाकिस्तान वहां पर तमाशा ना खड़ा कर दे हंगामा ना कर खड़ा कर दे इसके लिए कुछ महीनों के लिए इंटरनेट
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  • Ø  बंद हुआ था तो लोगों ने छाती पीट आज जब चीजें ठीक हो गई और वहां 5जी पहुंच गया है तो लोग कुछ बोलने को तैयार नहीं आज जम्मू कश्मीर में जब विकास हो रहा है बड़े-बड़े प्रोजेक्ट पहुंच रहे हैं बड़े-बड़े प्रोजेक्ट केंद्र बना रहा है भर भर के पैसा दे रहा है तब वो लोग कहां गायब हो गए हैं जो इस 370 के हटने पर छाती पीट रहे दरअसल 370 के हटने पर छाती पीटने वाला हर शख्स वो था जिसके सीने के अंदर भारत है ही नहीं उनका अपना एजेंडा वह परिवार थे जिनके खुद के बच्चे विदेश में पड़ेंगे और आपके बच्चे से वह हाथ में पत्थर देकर फेंकते थे या अगर
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  • Ø  आपका बच्चा पत्थर फेंके तो उसको कोई दिक्कत भी नहीं थी और वह पत्थर फेंकने वालों को कैसे पाकिस्तान से पैसा आता था यह भी सबको पता है कैसे आतंकियों के जनाजे में लोग शामिल होते थे भर भर के यह भी लोगों को पता है और आज वही लोग उनको दिखता है कि कैसे जम्मू कश्मीर के अंदर बड़ा बदलाव हुआ और जम्मू कश्मीर आज वैसा बन रहा है जैसा देश का दूसरा हिस्सा भी पर्यटन भाई साहब रिकॉर्ड तोड़ टूरिस्ट रहे रिकॉर्ड तोड़ और इस 370 को लेकर क्या तमाशा नहीं किया गया आज हर कश्मीरी को पता है कि जो कश्मीर उन्होंने देखा था पिछले 60 70 सालों में और जो कश्मीर अब बनकर तैयार हुआ
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  • Ø  है और हो रहा है उसमें जमीन आसमान मान का फर्क है और इसलिए आप देखिएगा शैला रशीद जैसे कई लोग जो लोग पहले इसका विरोध करते थे आज उनमें कुछ बदलाव दिखता है कुछ लोगों की बुद्धि सुधरी है कुछ की अभी भी नहीं सुधरेगी क्योंकि वह नरेंद्र मोदी के विरोध में यह मानसिक संतुलन खो बैठे और 204 में भी अगर नरेंद्र मोदी गए तो मुझे तो लगता है कि इन लोगों को मानसिक इलाज की जरूरत पड़ेगी हालांकि अभी भी कुछ लोगों को लगता है लेकिन इन लोगों को वाकई में भर्ती होकर इलाज कराना पड़ेगा ऐसी स्थि लेकिन अच्छी बात यह है कि इन लोगों के साथ से इनके दिमाग से यह चीजें नहीं
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  • Ø  चलती यह देश नहीं चलता और सुप्रीम कोर्ट ने भी आप साफ कर दिया है कि आर्टिकल 370 जो है वह हमेशा हमेशा के लिए खत्म हो गया आज हर भारतीय के लिए गर्व का दिन है खुश होने का दिन है और अगर आप इस फैसले पर अपनी कोई राय रखना चाहते हैं तो कमेंट बॉक्स में लिखकर जरूर बताइएगा वीडियो को लाइक और शेयर कीजिएगा शाम तक हो सकता है कि जजमेंट की पूरी डिटेल जाएगी तो न्यूज की पाठशाला में और विस्तार से आपको यह बातें बताऊंगा
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