आज बात करूंगा कि जिस वक्त मध्य प्रदेश राजस्थान छत्तीसगढ़ इनके नए मुख्यमंत्रियों को लेकर चर्चा हो रही है कि नरेंद्र मोदी ने क्या समीकरण बैठाया क्या सोचकर यह फैसले लिए उनको क्यों चुना अगर आप नरेंद्र मोदी की पॉलिटिक्स को करीब से समझने का प्रयास करेंगे क्योंकि उसको समझना बहुत आसान नहीं है तो आपको लगेगा कि नरेंद्र मोदी जो है वो सिर्फ मुख्यमंत्री नहीं चुन रहे ये जानते हुए भी कि 2024 उनका जीतना पक्का है नरेंद्र मोदी एक दूसरा मोदी ढूंढ रहा है

और वो दूसरा मोदी कौन है क्या वो योगी आदित्यनाथ हो सकते हैं क्या वो हेमंता हो सकते हैं या तीन नए मुख्यमंत्रियों में से कोई और हो सकता है यह यह सवाल क्यों खड़ा हो रहा है क्यों नरेंद्र मोदी दूसरा मोदी ढूंढ रहे हैं और यह क्यों कहा जाना चाहिए कि वो मोदी ढूंढ रहे हैं आज इसके बारे में बात करूंगा लेकिन उससे पहले आज एक और बड़ी खबर आई है .

सबसे पहले आपको मोदी मोदी को क्यों ढूंढ रहे हैं उस पर बात करूं उससे पहले आपको पहले उसकी बरसी थी और अचानक कुछ दो लोग जो है नए संसद भवन में घुस गए वहां पर देखिए कैसे जो वो ग्रीन क्रैकर्स होते हैं पर्यावरण को बचाने वाले वैसे कुछ क्रैकर्स फोड़ दिए वहां पर और बड़ा हंगामा हो गया कि दो लोग घुस गए

वह व्यक्ति है  जो चढ़कर आगे जाने का प्रयास कर रहा था फिर वह गिर गया और सिक्योरिटी वालों ने इनको पकड़ लिया लेकिन सवाल यह खड़ा हो रहा है कि यह कौन लोग थे कैसे घुस गए सिक्योरिटी ब्रिज बड़ी बात है वह भी तब जब आपको याद होगा वह खालिस्तानी आतंकी जो है पन्नू उसने कहा था कि 13 तारीख को मैं संसद पर हमला कर दूंगा इस तरह से दो लोगों का घुस जाना यह बड़ा सवाल खड़े करता है .

अभी पूरी जानकारी बाहर नहीं आई है जब पूरी जानकारी जाएगी तो आपको एकएक डिटेल के साथ बताऊंगा कि हुआ क्या क्यों हुआ यह लोग कौन थे फिलहाल हम

फिलहाल हम  आते हैं अपने दूसरे टॉपिक पर जिस पर आज हम लेख लिख रहे हैं चर्चा कर रहे हैं कि भाई मोहन यादव जो है उनको 19वां मुख्यमंत्री आज बना दिया गया  उन्होंने शपथ ग्रहण कर लिए इसके अलावा राजेंद्र शुक्ल ये डिप्टी सीएम बन गए हैं जगदीश देवड़ा ये भी डिप्टी सीएम बन गए हैं तो मध्य प्रदेश के अंदर आज शपथ ग्रहण हो गया है और शपथ ग्रहण के दौरान खुद प्रधानमंत्री मोदी मौजूद थे वो वहां पर गए हुए थे इसके अलावा अगर आप देखेंगे उससे ठीक पहले मोहन यादव जो है वो बैठे हुए हैं शिवराज सिंह चौहान और ज्योतिरादित्य सिंध्या के साथ इन दोनों का चेहरा आप देख लीजिए एकदम उतरा हुआ है.

तो जो भी अब उतरा रहे चढ़ा रहे जो रहे इनको स्वीकार तो करना ही है शपथ ग्रहण में साधु संतों को भी बुलाया गया था कि भैया तुमको हिंदुत्व से परेशानी हो हिंदू साधु संतों से परेशानी हो लेकिन नरेंद्र मोदी का एजेंडा क्लियर है कि भाई देश की बात करनी है हिंदुत्व की बात करनी है और क्यों कह रहा हूं कि नरेंद्र मोदी जब इन मुख्यमंत्रियों को चुन रहे हैं तो वह एक और मोदी की तलाश कर रहे हैं आपको इसके लिए इतिहास में जाना पड़े नरेंद्र मोदी का इतिहास किस तरह से नरेंद्र मोदी को आप

गुजरात के मुख्यमंत्री पर के तौर पर जब जानते थे. उससे पहले अगर आप देखेंगे तो नरेंद्र मोदी यह लाल कृष्ण आडवाणी नजर रहे हैं  और यह उस वक्त जो रथ यात्रा निकली थी उस यात्रा के समय जब नरेंद्र मोदी कहीं नहीं होते थे.

 

उसी तरह से अगर आप देखेंगे राम मंदिर के लिए   वह हर बार नजर आतेN यानी नरेंद्र मोदी पूरे डेडिकेशन के साथ राम मंदिर के लिए काम कर रहे थे . भले अगर आप देखेंगे तो वह साइड में होते थे क्योंकि उस वक्त सेंटर स्टेज में लाल कृष्ण आडवाणी मदनलाल खुराना इस तरह के नेता हुए करते थे लेकिन सारी तैयारी करना मंदिर आंदोलन

के  लिए अपने आप को झोक देना यह काम नरेंद्र मोदी कर रहे थे क्योंकि हिंदू हिंदुत्व की बात हमेशा से करते रहे और संगठन के आदमी रहे संगठन को साथ लेकर चलना किस तरह से लोगों को संगठित करना है और संगठन को लेकर चलना है यह वो काम करते रहे उसको देखकर लोग सोचते अरे नरेंद्र मोदी पर तो किस्मत मेहरबान है  किस्मत नहीं इस आदमी ने बहुत काम किया है बहुत मेहनत की है तब जाकर ये यहां पर पहुंचे और जब आपको नरेंद्र मोदी की स्टोरी बता रहा हूं तो आप देखिए जब

नरेंद्र मोदी की हम बात करते हैं नरेंद्र मोदी को जब मौका मिला मोदी को मोदी जब सीएम बने उस वक्त उनके लिए क्या फैक्टर काम कर रहा था.

 एक केंद्र से वाजपेई जी ने उनको भेजा यानी केंद्र का साथ था बड़े लीडर्स का साथ उनके साथ मौजूद था दूसरा संगठन में पकड़ पड़ थी उनकी वहां वो काम कर चुके थे अलग-अलग जगह पर तो संगठन में पकड़ उनके साथ उनके लिए काम रही थी तीसरी बात हिंदू और हिंदुत्व की प्रखरता से बात करते थे उसमें कोई नहीं था. ये दो फैक्टर और यह तो चकि नरेंद्र मोदी खुद ही केंद्र में अगर साथ देंगे किसी का तो वो समझ में आता है तो ये

दो फैक्टर की संगठन में पकड़ हो हिंदुत्व हो चौथा फैक्टर कि नरेंद्र मोदी का जो विजन था ना वो उसकी तारीफ हमेशा से सब करते थे कि बस इस आदमी को ना अगर मौका मिलेगा तोय कुछ करके दिखाए तो जो लोग आज कह रहे हैं कि भाई भजन लाल शर्मा जो है वो तो पहली बार विधायक बने और उनको सीधा मुख्यमंत्री बना बॉस नरेंद्र मोदी जब मुख्यमंत्री बने थे पहली बार तब तो वह विधायक भी नहीं थे उनके पास कोई अनुभव नहीं था सरकार चलाने का हां संगठन का अनुभव जरूर था हिंदुत्व पर उनकी पकड़ थी हिंदुत्व को लेकर चलना है सीने पर लेकर चलते थे जैसे आज लेकर चलते हैं यह नरेंद्र

मोदी की पहचान थी और इसीलिए आज जिन लोगों को नरेंद्र मोदी खड़ा कर रहे हैं आप उनको देखेंगे तो वो नरेंद्र मोदी उनके अंदर भी वही झलक ढूंढ रहे हैं जो उनके अंदर मौजूद थी. जब उन्हें मुख्यमंत्री बनाया था जैसे अगर आप देखिए विष्णुदेव साय हैं जो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री बने हैं यह मोहन यादव है जो कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बने हैं और यह भजनलाल शर्मा है जो राजस्थान के मुख्यमंत्री बने इनमें सब में कॉमन बात है हिंदुत्व - हिंदुत्व का फैक्टर अपने धर्म के प्रति समर्पण हिंदुत्व के लिए समर्पण और देश के लिए समर्पण तो यही वो फैक्टर है  जो नरेंद्र मोदी के में दिखा था .

शायद उस वक्त वाजपई साहब को और नरेंद्र मोदी को वही चीज आगे लेकर गई .नरेंद्र मोदी इन लोगों में वही तलाश कर रहे हैं . और इसीलिए भाई आज लोग कहते हैं कि मोदी के बाद कौन

योगी आदित्यनाथ का नाम आता है- कुछ लोग हेमंता विश्व शर्मा की बात करते हैं .नरेंद्र मोदी इतने मोदी खड़े कर देना चाह रहे हैं. कि अगले 207 तक के लिए जो उन्होंने लक्ष्य रखा है. भारत को आगे ले जाने का वह लक्ष्य पूरा करने के लिए एक के बाद एक मोदी मिलते जाए इस देश को. हालांकि नरेंद्र मोदी की जगह लेना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है .लेकिन इसी तरह किसी को लगता था . कि भाई वाजपेई जी की जगह कौन ले सकता है

 

कोई नहीं ले सकता आज नरेंद्र मोदी कहां आगे चले गए .वह खत्म हो गया इसलिए आप जिन लोगों को वो मुख्यमंत्री बना रहे हैं अगर उनको गौर करेंगे सबकी उम्र लगभग उसी 50 में है जैसे कि नरेंद्र मोदी की उस वक्त हुआ करती थी जब वह पहली बार मुख्यमंत्री बने थे .

गुजरात संगठन हिंदुत्व यंग चेहरे और उनको मौका देकर एक तरह से उन पर काम करना यह नरेंद्र मोदी प्रयास कर रहे हैं और इसलिए कह रहा हूं कि हिंदुत्व का एजेंडा नरेंद्र मोदी के दिमाग में है आप देखिए छत्तीसगढ़ सीएम पद की शपथ लेने से पहले विष्णुदेव साई ने एक फोटो को माथे पर लगाया

फोटो को माथे पर लगाया वो फोटो थी दिलीप सिंह जुदेव की और इतना ही नहीं सिर्फ दिलीप सिंह जुदेव की फोटो को माथे पर नहीं लगाया बल्कि उनके परिवार से जाकर मिले ये उनका परिवार है जिससे जाकर विष्णुदेव साय ने मुलाकात की .

 दिलीप सिंह वो व्यक्ति हैं . जिन्होंने छत्तीसगढ़ की राजनीति में बड़ा नाम कमाया था . और उनकी पहचान जनजातीय समाज के उन लोगों का चरण पखार कर घर वापसी कराने के लिए थी . जो ईसाई मशीनरी की साजिशों का शिकार होकर धर्मांतर हो

 गए तो दिलीप सिंह जुदेव वो व्यक्ति थे जो हिंदू धर्म के लिए समर्पित थे .

और जो ईसाई मशी मिशनरीज थे उनके तरफ जो लोग अलग-अलग भाई कि ये तुम्हारा बच्चे का एडमिशन स्कूल में हो जाएगा 10 तरह की चीजें जो आरोप लगते हैं वो प्रलोभन के चक्कर में लोग चले गए थे उनको वापस घर लाते थे और जब लाते थे तो भाई पैर धो के उनका लाते थे तो 2013 में अपने निधन से पहले दिलीप सिंह जुदेव घर वापसी का ये अभियान चलाते रहे थे दिलीप सिंह जुदेव का मानना था कि एक बार जब कोई व्यक्ति ईसाई बन जाता है तो उसके मन में भारत माता के लिए वैसा प्रेम नहीं रह जाता ऐसे में इन लोगों को तोड़ना बहुत आसान हो जाता है उनका मानना था कि ईसाई मिशनरियों के धर्मांतरण की साजिश है .

भारत को विखंडित करने की साजिशों का हिस्सा दिलीप सिंह जुदेव ने 2009 में एक इंटरव्यू में कहा था कि मैं दुनिया घूम चुका हूं मुझे पता है ईसाई मिशनरियों का  धर्मांतरण के लिए क्या तरीके अपनाती है ये सिर्फ धर्मांतरण नहीं है यह देश का चरित्र बदल सकता है यहां मंदिरों के बगल में चर्च के ऊपर क्रॉस लगाया गया है क्या हम वेटिकन में हनुमान मंदिर बना सकते हैं मैं ईसाइयों के विरुद्ध नहीं हूं लेकिन धर्मांतरण के विरुद्ध जरूर तो आज की डेट में जो विष्णुदेव साय बनाए गए हैं मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ के वो पूजते हैं इन दिली सिंह को

जिन्होंने काम किया घर वापसी कराई हिंदुओं की जो उधर ईसाई बन गए इसी तरह से विष्णुदेव साय का भी यही ट्रैक रिकॉर्ड कि उन्होंने इस मुहिम को आगे बढ़ाया हुआ है और जिस जगह पर उन्होंने बीजेपी को 26 में से 22 सीटें दिलाई जीता कर जीत दिलाई जो 26 की 26 एक तरफ एक कांग्रेस के पास चली गई थी उस जगह पर उन्होंने इस तरह का जो काम हो रहा था उसको रोका है

यानी नरेंद्र मोदी का अगर आप काम देखेंगे एक प्रशासक के तौर पर धर्म वो देखते नहीं घर मिलना है तो हिंदू मुस्लिम सिख साई सबको मिलेगा जो गरीब है शौचालय मिलना है सबको मिलेगा सिलेंडर मिलना है सबको मिलेगा

फलाना फलाना जो सरकारी योजनाए हैं उसमें कोई इधर उधर नहीं करते लेकिन हिंदुत्व को छोड़ दे यह भी नहीं करते काशी विश्वनाथ का विकास करना हो राम मंदिर बनने की बात हो राम मंदिर आंदोलन की बात हो या फिर अगर आप देख लीजिए किस तरह से जिसको आजकल रिलीजियस टूरिजम कहा जा वो नरेंद्र मोदी बहुत मजबूती से करते हैं और इसीलिए वो एक मोदी नहीं कई मोदी जैसे अगर आप योगी को देखेंगे योगी आदित्यनाथ को जब उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया गया उस वक्त किसी को नहीं पता था कि योगी आदित्यनाथ क्या चीज है भाई सांसद थे उनके बड़े बयान वायरल होते थे लेकिन तब किसी को नहीं पता था कि योगी क्या होंगे

हेमंता विश्व शर्मा हेमंता तो कांग्रेस में हुआ करते थे लेकिन उनका टैलेंट देखकर उनकी बातें देखकर कि भले ये आदमी कांग्रेस में हो लेकिन इसका डीएनए जो है वो उसी तरह से देश के लिए हिंदुत्व के लिए बात करने वाला है जैसा किसी बीजेपी वाले का होगा तो वो उनको उठा कर ले आए और वह काम हुआ आप देखिए इसके लिए नरेंद्र मोदी ने रिस्क लिया जैसे मैं आपको दिखाऊ आज भी शिवराज सिंह चौहान को देखिए कैसे बिफरे हुए हैं

मुझे पूरा विश्वास है मध्य प्रदेश की समृद्धि और विकास को और जनता के कल्याण को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे उनको शुभकामनाएं आज प्रधानमंत्री जी पधार रहे हैं उनका हृदय से स्वागत गृह मंत्री जी का स्वागत हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष नड्डा जी का स्वागत और मित्रों अब विदा जस की तस रख दीनी चदरिया अब इनको 18 साल मुख्यमंत्री रहा रहने का मौका मिला लेकिन इनके अंदर से वो फीलिंग ही नहीं जा रही अविधा अरग दिनी चदरिया बहुत ये ये सब ना वो दिखाता है कि आपका अटैचमेंट कितना है कुर्सी से और नरेंद्र मोदी उस अटैचमेंट को लेकर चलने वालों के

लाल चौक यह उस जमाने की बात है और आज देखिए इन्होने कश्मीर को कहां से कहां बदल दिया उस लाल चौक में जहां हमेशा घेरा बंदी हुआ करती थी वहा लोग आराम से घूम रहे राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा निकल गई बस कोई सुरक्षा की टेंशन नहीं इसी तरह से आपको दिखाता हूं जिन लोगों को नरेंद्र मोदी चुन रहे उनमें हिंदुत्व की कैसे झलक दिखती है विष्णुदेव साय हेमंता योगी की बात कर रहे

यह नरेंद्र मोदी करना चाहते हैं और उन्हें पता है कि यह काम करना है और इसको कंटिन्यूटी में रखना है तो और नरेंद्र मोदी बनाने होंगे और इसलिए कास्ट समीकरण वगैरह वगैरह 10 चीजें भले उन्होंने सोची हो लेकिन बैक ऑफ माइंड देश और हिंदुत्व ये दो चीजें इन चेहरों को चुनने में नरेंद्र मोदी ने रखी है अपने दिमाग में इस पर आपकी राय क्या है क्या नरेंद्र मोदी का विजन क्लियर दिखता है आपको क्या आपको भी लगता है कि वो और मोदी ढूंढ रहे हैं तलाश रहे हैं और क्या यह उनका निर्णय फैसला सही है कमेंट बॉक्स में जरूर बताइए