- मिथ्या मानेंगे तो माइथोलॉजी है अगर आप सत्या मानेंगे तो सत्य लॉजी है तो जब सतयुग आएगा तो वो ज्ञानगंज में जो चीजें जमा हो रही है वो सब वापस सतयुग की शुरुआत करने के लिए आएंगे सात चिरंजीवी भी है. खुलेआम हमको नहीं दिखते हैं और मुझे लगता है कि वोह ना आपके मेरे बीच में हम जैसे बनके घूम रहे हैं.
- खाटू श्याम जी बोले मैं इनकी तरफ से लडूंगा फिर जब वोह कमजोर हो जाएंगे तो मैं उधर चला जाऊं फिर इनकी तरफ से लडूंगा फिर वो कमजोर हो जाए मैं उधर चला जाऊ तो कृष्ण जी से जब पूछा गया कि गर्दन काट क्यों टांग दिए व रख दिए वहां पे तो कृष्ण जी ने बोला कि हमेशा समाज के
- लिए वो
लोग सबसे ज्यादा
खतरनाक है जो
किसी पक्ष में
नहीं होते तो
अरियो लेके जो
डर है वह डर
मुझ में इसलिए नहीं
है क्योंकि मुझे
मालूम है कि वह
हार्मलेस होते हैं
पर हमारे ही
बीच में कुछ लोगों
ने ऐसी कहानियां बना
रखी है कि वो
तो कैनिबल होते
हैं और वो तो
मार के खा जाते
हैं और शव के
ऊपर बैठ के साधना
करते हैं इन सब
बातों में से कुछ
भी गलत नहीं है
सिवाय इसके कि
वह मार के खा
जाते रुद्राक्ष की
माला में भी मैं
हूं कृपाण कटार
और भाला में
भी मैं हूं श्वेत
भी हूं और शुद्ध
भी मैं हूं विरुद्ध
हो मेरे तो
युद्ध भी मैं हूं
इतिहास में बहा
आंसू और खून भी
मैं हूं .
- अब जो कह के मिलेगा वह सुकून भी मैं हूं कि इस धरती का मैं केंद्र बिंदु हूं प्रणाम मैं हिंदू नमस्कार जागरण मंथन का आज का जो इंटरव्यू है वह बहुत ही अलग और बहुत ही खास है अब तक के जितने भी इंटरव्यूज किए उससे बहुत अलग ये विषय होने वाला है क्योंकि जब हम बात करते हैं हिंदू धर्म की सनातन धर्म की तो कई ऐसे विषय हैं कई ऐसा इसको लेकर के भ्रांतियां है या मान्यताएं हैं समझ है और बहुत सारा ज्ञान है लेकिन अंत में जो बात इंपॉर्टेंट रह जाती है वह है सही ज्ञान होना किसी भी धर्म को समझने के लिए उसके बारे में सही ज्ञान होना और जब सही ज्ञान की हम बात करते हैं.
- तो आजकल एक नाम बहुत पॉपुलर है जिनको हमने अपने स्टूडियो में इनवाइट किया अक्षत गुप्ता आपका बहुत-बहुत स्वागत है बहुत बहुत धन्यवाद अक्षत एक ऑथर है और जो सबसे नेशनल बेस्ट सेलर जो इनकी किताब की ट्रायलॉजिस से वो बहुत प्रसिद्ध आप हुए हैं और यह किताब भी बहुत प्रसिद्ध य तीनों किताबें भी बहुत प्रसिद्ध हुई है आप एक स्क्रीन राइटर हैं पोएट है लिरिसिस्ट है और जब बात भी हमारी हो रही थी कि आप कहते हैं कि मैं एक फुल टाइम हस्बैंड हाउस हस्बैंड हूं बहुत इंटरेस्टिंग आपका ये पूरा इंट्रोडक्शन रहा और सबसे बड़ी बात ये है अक्ष मैंने सिर्फ सोचा था कि आपका
- इंटरव्यू मुझे लेना है दो-तीन दिन पहले मैंने आपके इतने सारे वीडियोस देखे थे लेकिन मन में उसी दो-तीन दिन पहले आया कि आपका मुझे इंटरव्यू लेना है ना जाने क्या कायनात ने क्या ऐसा कंस्पायर किया कि आपसे मेरा दो दिन के अंदर ही इंटरव्यू लाइन अप हो गया सब नियती है और पहले से ये सब निर्धारित होता है अब कौन कैसे किस तक पहुंचेगा वो बस वो रास्ता चुनना बचता है तो लिखा हुआ होगा ये यह समय एगजैक्टली हम दोनों को यही होना चाहिए था तो हमें बहुत अच्छा अच्छा ये जो आपकी किताब है द ट्राइल है जो द हिडन हिंदू जी क्या मकसद है इस किताब को लिखने का आपने क्यों यही
- सब्जेक्ट चूज किया इसके दो जवाब है स्मृति पहला जवाब ये है कि आजकल के जो जनजी है जो यंग स्टर्स है वो ना मार्वल और डीसी की फिल्में बहुत ज्यादा देख रहे हैं जो कि बहुत अच्छी बात है उससे परहेज नहीं है कि क्यों देख रहे हो भाई वेस्टर्न जरूर देखना चाहिए कहीं से भी किसी भी रूप में नया ज्ञान अर्जित हो तो होना चाहिए और साथ में इंटरटेनमेंट जुड़ जाए तो उससे अच्छा क्या ही हो सकता है परेशानी इसमें नहीं है कि वो वेस्टर्न कल्चर की फिल्में देख रहे हैं और मार्वल और डीसी को फॉलो कर रहे हैं लेकिन आप उनसे पूछेंगे ना कि मार्वल फिल्म्स के आप सुपर हीरोज का नाम बताइए आप
- उनसे सात पूछेंगे वो आपको 10 बताएंगे जिन पे फिल्में नहीं आई है वो उनके बारे में बताएंगे आगे जो आने वाली हैं वो भी बताएंगे वो सुपर हीरोज कैसे बने उनके अगेंस्ट विलेंस कौन से थे हम आने वाले विलेंस कौन से हैं उनको सब पता है वही हाल डीसी का है कि भाई उनको ये सब डिफरेंस मालूम है कि मार्वल में स्पाइडरमैन है लेकिन सुपरमैन और बैटमैन जो है वो डीसी मेंडी है ना आयरन मैन मार्वल में है लेकिन एक्स वाईजी डीसी में हम पर उन्हीं बच्चों से अगर आप पूछेंगे ना कि सात इम मोर्टल्स का नाम बताइए वो तो हमारे लिए तो वही सुपर हीरोज हर कोई किसी भी जुबा में हो या किसी
🙏
- भी फिल्म में हो या किसी भी कल्चर से हो अगर कोई इनमोर्टल है तो सुपर हीरो तो है हम तो हमारे जो सबसे पहले सुपर हीरोज हम ये स्पाइडरमैन और बैटमैन और सुपरमैन और थॉर इन सबसे पहले जिनके बारे में लिखा गया है बोला गया है बताया गया है वो है सात चिरंजीवी वो सात नाम आपको 10 में से नौ लोग नहीं बता पाएंगे तीन चार बताएंगे अश्वत्थामा हनुमान जी परशुराम खत्म बाकी के चार नहीं बता पाएंगे तो तो मेरे साढ़े साल के बेटे कोई अलग नहीं है उनको जब कुछ भी चीज याद कराने की कोशिश कर रही थी कर रहा था मैं तो याद हो नहीं रहा था तो मुझे समझ में आया कि मार्बल और डीसी वाले ऐसा
- क्या कर रहे हैं जो हम नहीं कर पा रहे हैं अपने बच्चों को अपने ही कल्चर के प्रति एंटरटेन करना बल्कि इंटरेस्ट डेवलप करने के लिए हम क्या करें तो वहां से फिर मैं एक कहानी लिखना शुरू किया जिसकी जिसका वन लाइनर कुछ ऐसा है कि एका घोरी है जो 2020 में पकड़ में आया और उसको इंट गन पर बैठाया उसको नारकोटेस्ट इंजेक्शन दिए साथ में उसको हिप्नोटाइज कर लिया तो सम्मोहन और नारकोटेस्ट इंजेक्शन के बाद उसके पास झूठ बोलने की कोई जगह नहीं है उसके मुंह से जो निकलेगा सच निकलेगा अब जब वो बताना शुरू करता है तो वो कहता है कि मेरा नाम ओम शास्त्री है मेरी उम्र 40 साल के आसपास
- है मेरी उम्र बढ़ती नहीं है तो एक मेरी उम्र नहीं बढ़ती दूसरा मैं मरता नहीं हूं मैं सतयुग से देव भूमि भारत में हूं पकड़ में अब आया हूं 2020 में मैं रामायण का हिस्सा भी रहा हूं और महाभारत का भी मैं राम से भी मिला हूं और कृष्ण से भी लेकिन मैं वो सात चिरंजीवी में से कोई नहीं हूं हू मैं वह आठवां चिरंजीवी हूं जिसके बारे में दुनिया को अब तक कुछ पता नहीं है और मैं अभी तक छुपा हुआ था इतिहास के पन्नों में आई वाज हिडन इन द पेजेस ऑफ पास्ट और अब आई रिवील्ड माइसेल्फ इन सर्च ऑफ दोस सेवन इम मैं उन सात चिरंजीव को ढूंढ रहा हूं तो वो सात चिरंजीवी कौन-कौन है हनुमान
- जी परशुराम अश्वत्थामा वेदव्यास कृपाचार्य राजा बाली जिसके लिए वामन अवतार लिया था विष्णु जी ने और विभीषण रावण के छोटे भाई तो ये सात लोगों को मैं ढूंढ रहा हूं और फिर कहानी में जो जो होता है वो ट्रिलजी है तीन पार्ट में हिंदी इंग्लिश दोनों में रिलीज हो चुकी है तो कई ऐसे बच्चे हैं कई ऐसे यंगस्टर्स हैं जो उस कहानी में इवॉल्व होके बहुत सारी चीजें सीख जा रहे हैं हमारे कल्चर के बारे में क्योंकि फिर जब आप जब उसने कह दिया कि मैं चार चारों युगों में था तो फिर आपको समझना है कि युग क्या होते हैं और युग डिवाइडेड कैसे हैं तो आप अनगिनत लोगों से पूछेंगे कि चार युग
- का नाम बताओ कई तो बता नहीं पाएंगे जो बताएंगे ना वो सीक्वेंस गलत बताएंगे वो बोलेंगे कि सतयुग द्वापर त्रेता क्योंकि द्वा मतलब टू और त्रे मतलब थ्री फिर उनको समझाना पड़ता है कि नहीं सतयुग के बाद त्रेता है त्रेता के बाद द्वाप तो फिर एक सवाल आता है क्यों अननेसेसरी क्यों कंफ्यूजन है तो फिर उसका लॉजिक बताना पड़ता है कि सतयुग में चार अवतार हुए थे उसके सेकंड युग में तीन अवतार हुए थे इसलिए त्रेता कहलाता है फिर दो हुए थे इसलिए द्वापर कहलाता है और कल की आएंगे इसलिए कलयुग तो ये बहुत छोटी सी चीजें जो मुझे लगता है फिर जब आप विष्णु अवतारों की
- बात करें तो फिर आपको दशावतार एक्सप्लेन करना पड़ता है जब आप सेवन इम्मोर्टल्स ए सुपर हीरोज बता रहे हैं तो वो सातों चिरंजीविकल केर वो कैसे बने किसको श्राप मिला किसको वरदान मिला किसको किससे मिला वो अपने आप कहानी में आता है और वो सब लोग आज की पृष्ठभूमि में आ रहे हैं तो आमतौर पर ऑथर्स क्या करते हैं कि रीडर को उस वक्त ले जाना चाहता है मैं वो नहीं कर रहा हूं आज का जनजी जो मार्वल और डीसी देख रहा है उसको उसके लेवल की चीज चाहिए हमारा पर्पस है वो समझाना किसी भी भाषा में समझ में ये सात चिरंजीवी अभी के समय में एकएक करके आने लग जाते
- हैं तो वहां से जो कहानी जिस तरीके से शेप अप होती है वो वो है जो जो भाषा और जो देखना सुनना समझना इन बच्चों को अच्छा लगता है इसलिए चीजें चल रही है अच्छा अक्षत क्योंकि मुझे लगता है कि बहुत रिसर्च करी होगी बहुत समझा होगा पहली बात है कि जब आप अटेंप्ट करते हैं ऐसा कुछ लिखना किसी धर्म के बारे में तो बहुत कुछ पढ़ना पड़ता है पहले अपने जो लॉजिस है फैक्ट्स हैं वो सबसे पहले क्रॉस चेक करके फिर चेक करके फिर जा करके आप ऐसा करते हैं ये चिरंजीव के बारे में बात करें ज्यादातर लोगों को बच्चों की बात कर रहे हैं मुझे लगता है कि बड़ों को भी ज्यादातर दो
- चिरंजीवी पता है कि हनुमान जी हैं अश्वत थामा है जो बड़े फेमस है उसके अलावा मुझे लगता है कि आजकल लोगों को क्यों यही दोनों नाम इतने फेमस है बाकी चिरंजीविस क्यों नहीं है और दूसरी बात है क्या सच में चिरंजीवी है हमारे आसपास सोसाइटी में जी देखिए कई लोग ना माइथोलॉजी बोलते हैं तो मैं कहता हूं कि अगर आप मिथ्या मानेंगे तो माइथोलॉजी है अगर आप सत्या मानेंगे तो सत्य लॉजी तो यह तो फेथ वाली बात है कि भगवान को मानने वाले भगवान को मानते हैं जीसस को मानने वाले जीसस को अल्लाह को मानने वाले अल्ला पर यह सवाल तो हर चीज पर उठाया जा सकता है कि हर वो चीज जो नहीं
- दिखती क्या व है तो ऑक्सीजन तो है दिखता नहीं अभी मैं रिसेंटली कहीं सुना बहुत अच्छी बात किसी ने कही कि यह दूध जो है है इसी में घी भी है क्या हम तो बोले हां है तो बोले तो इस दूध से दिया जला के बताओ तो उसने बोला कि नहीं पहले दूध को उबालना पड़ेगा फिर उसका मक्खन निकलेगा फिर मक्खन को जलाया जाएगा तब ी निकलेगा उससे दिया जलेगा तो साथ चिरंजीवी है खुलेआम हमको नहीं दिखते हैं और मुझे लगता है कि वो ना आपके मेरे बीच में हम जैसे बन के घूम रहे हैं मतलब अगर हम ये उम्मीद करें क्योंकि हमने हमेशा से देखा वैसे ना कि परशुराम हाथ में फरसा पकड़े
- हैं और चीते की छाल पहने हुए हैं और रुद्राक्ष की मालाएं पहने और आंखें बड़ी-बड़ी है और गुस्से में वो आज अगर है जो कि है तो वैसे नहीं घूमे एक आपको एक छोटा सा विजुअल इमेजिनेशन देता हूं ठीक है सोचिए कि आप मेट्रो ट्रेन में किसी एक स्टेशन से कहीं जा रही हैं आपके सामने एक बहुत बुजुर्ग आदमी बैठा है जो एक छोटे से बच्चे को देख रहा है आपके बगल में बैठे किसी और के साथ हम आपने देखा दोनों ये किसको देख के मुस्कुरा रहा है बच्चे को बच्चा वापस उसको देख के मुस्कुरा रहा है आपने सोचा कि जिंदगी के पहले पड़ाव में आया हुआ एक इंसान जिंदगी के आखिरी पड़ाव को देख के
- मुस्कुरा रहा है एंड वाइस आवर अगली जगह स्टेशन पे ट्रेन रुकी आप वहीं बैठे हुए थे यह बुजुर्ग आदमी उठा चला गया आपको नहीं पता ना वो कौन था क्या मालूम परशुराम थे जो नॉर्मली शर्ट पैट चेक वाली ब्राउन वाइट कलर की शर्ट पहने होंगे एक चश्मा यहां लटकाए होंगे या पहने होंगे और बस एक नॉर्मल सा शख्स दिखा होगा आप सोचिए कि जो बच्चा था यह बच्चा जब उतना बूढ़ा हो जाएगा इस मेट्रो में शायद जा रहा होगा कहीं और जा रहा होगा तो भी ये दोनों एक दूसरे को देख के मुस्कुराएंगे सिर्फ इस बच्चे को नहीं पता होगा कि ये वही है जो आज से 50 साल 60 साल पहले मुझे देख के
- मुस्कुरा तो मेरा मानना है कि ये सब है और इस तरीके से हैं कि घुल मिल गए हैं जब उनकी जरूरत पड़ेगी तो वो सामने आ जाएंगे सिर्फ हनुमान जी और अश्वथामा ही लोगों के बीच में इतना कॉमन नाम है कि अच्छा चिरंजीवी दो ही मतलब अमूमन लोग काउंट भी नहीं कर पाते हम मिलेनियल की बात कर ले हमसे बड़ी जनरेशन तो जरूर उनको पता होगा आई डाउट वो भी मगर क्यों यही दोनों नाम है विभीषण क्या बाद में नहीं पता कि कहां कैसे क्या क्यों नहीं इतना आईडिया है देखिए ये इनको बनाने वाले हम नहीं है लेकिन कोई चीज ज्यादा प्रमोट होती है जो ज्यादा हम लोग को इंट्री करती है तो
- हनुमान जी के क्योंकि राम भक्त थे और उसमें उनका बहुत प्रॉमिनेंट रोल है और रामायण अपने आप में बहुत बड़ी गाथा है इस वजह से और हम कलयुग में है हम वी आर ऑलवेज अट्रैक्टेड टुवर्ड्स नेगेटिव मोर तो अश्वथामा इन सात चिरंजीव में एक लते ऐसे चिरंजीवी है जिनको श्राप स्वरूप मैं यही कहने वाली थी चिरंजीवी क्या पॉजिटिव है क्योंकि अश्वत थामा की अगर बात करें तो वो तो कर्स थे तो उनको चिरंजीवी कहना ठीक है जी बिल्कुल ठीक है और आप अगर एक एक वाइडर पिक्चर में एक वाइडर पिव में देखेंगे तो मुझे लगता है कि किसी को श्राप स्वरूप मिला और किसी को वरदान स्वरूप मिला लेकिन
- है तो सब श्रापित क्योंकि अगर आप और मैं यही रुके रहे और हमारे जानने वाले सब कोई चले जाए तो यह श्राप से कम नहीं है व तकलीफ लगातार झेलते रहना क्या सब एक दूसरे को ढूंढ ही रहे होंगे मब एक हाइपोथेटिकल सिचुएशन में बात कर रही जी तो मैंने अपने किताब में एक जगह का वर्णन किया है उस जगह का नाम है ज्ञानगंज ये ज्ञानगंज कैलाश पर्वत के ऊपर एक छुपा हुआ शहर है जैसे मार्वल फिल्मों में वाकांडा नाम का एक शहर है कर जहां जो ब्लैक पैंथर का राज्य है तो वो वाकांडा वाला जो पूरा कांसेप्ट उठाया हुआ है ना कि है तो लेकिन कैमफ्लेज है आपको दिखता नहीं तो ये ज्ञानगंज से उठाया
- हुआ है ये मैंने मन गणन नहीं बनाया ज्ञानगंज ऑलरेडी ज्ञानगंज का वर्णन है हम लोगों के पुराणों मेंा कि एक पूरा ऐसा शहर है जहां पे सप्त ऋषि और जितने लोगों को मोक्ष की प्राप्ति होती है और वो सब वहां पे इकट्ठा होते हैं जितने जानवर यहां से एक्सटिंक्ट होते जा रहे हैं वो सब वहां पे जमा हो रहे हैं क्यों हो रहे हैं क्योंकि कलयुग के बाद फिर सतयुग शुरू होगा तो सतयुग शुरू करने के लिए आपको वो सब कुछ फिर से चाहिए तो हम कैरम खेलते हैं या हम चेस खेलते हैं तो जो जो गोटी उसके अंदर चली जाती है उसको हम साइड में रख देते हैं ना फेंक तो नहीं देते क्यों क्योंकि फिर
- से बोर्ड सेट करना पड़ेगा गेम के लिए चाहे वो चेस होया कोई भी गेम इनफैक्ट लूडो ले लीजिए सा सीढ़ी ले जब आपकी कोई गोटी कटती है ना तो वो वापस उस बॉक्स में जाती है है ना उस बॉक्स में कितने वो होते हैं चार एक कलर और चार वो होते हैं तो वो जो और ऐसे टोटल कितने होते हैं चार तो वो है सतयुग त्रेता युग द्वापर युग और कलयुग और वो चार जो है वो वहां जमा हो रहे हैं और फिर से जब छह आता है फिर निकालते हैं तो जब सतयुग आएगा तो वो ज्ञानगंज में जो चीजें जमा हो रही है वो सब वापस सतयुग की शुरुआत करने के लिए आएंगे और ये सात चिर जीवी जो हैं वो वहीं
- रहते हैं हम मेरे हिसाब से ज्ञानगंज में आते जाते रहते हैं अच्छा अब जैसा कि मैं कह भी रही थी अ बहुत तैयारी की होगी पढ़ा होगा बहुत डिटेल में फैक्ट्स चेक क्रॉस चेक फिर से चेक किए होंगे ऐसे में अ क्योंकि कहां से ये इंस्पिरेशन आया कि मैं इसी सब्जेक्ट को चूज करके मतलब आगे बढूं या इसी सब्जेक्ट पे लिखूं खासकर हिंदू धर्म को क्योंकि जब आप ऐसा कुछ अटेंप्ट करते हैं तो बहुत सारी ऐसी फोर्सेस होती हैं जो सोसाइटी में जिनको आप अपने काम से जस्टिफाई करना भी आपको पड़ता है कई कई बार तो कैसा वो था मेरी लिखी हुई कविता आजकल काफी प्रचलित है आपके सवाल का
- जवाब उसमें छुपा है और इसी बहाने में आपके कुछ ऐसे श्रोता होंगे जो मुझे पहली बार सुन रहे होंगे तो उनको यह कविता भी सुना देते हैं क्या है ना कि आप सिर्फ उसी विषय में बात कर सकते हैं सोच सकते हैं लिख सकते हैं जिस विषय में आपकी जानकारी मैं एक हिंदू में पैदा हुआ मैं कुरान की बात नहीं कर सकता मुझे पता नहीं मेरी अप ब्रिंगिंग उन कहानियों के बीच में नहीं हुई है जो उनकी होती होंगी जैसा मैंने कहा जो आपको आता है और जहां तक आपने एक और सवाल पूछा था कि किताब का नाम द हिडन हिंदू है तो मतलब हिंदू ही क्यों मोर और लेस ये दोनों पूरक है एक दूसरे के सवाल ये
- दोनों सवाल एक दूसरे के तो एक कविता है जो कुछ इस प्रकार है कि रुद्राक्ष की माला में भी मैं हूं कृपाण कटार और भाला में भी मैं हूं श्वेत भी हूं और शुद्ध भी मैं हूं विरुद्ध हो मेरे तो युद्ध भी मैं हूं इतिहास में बहा आंसू और खून भी मैं हूं अब जो कह के मिलेगा वह सुकून भी मैं हूं कि इस धरती का मैं केंद्र बिंदु हूं प्रणाम मैं हिंदू हूं चिता की अग अग्नि गंगा का पानी कब्र की मिट्टी और लोबान भी मैं हूं पीर फकीर अली वली सियावर राम का हनुमान भी मैं हूं भोला हूं सरल भी तुम्हारा मित्र भी मैं हूं घोल भी दूं तुमको घुल भी जाऊं
- तुम में कुछ ऐसा चरित्र भी मैं हूं इस धरती का मैं केंद्र बिंदु हूं प्रणाम मैं हिंदू हूं प्रणाम का भाव भी मैं हूं आक्रमण का घाव भी मैं हूं सहनशील स्थिर और शांत भी मैं हूं देव भूमि भारत का हर प्रांत भी मैं हूं शक्ति भक्ति और ना थकती क्रांति भी मैं हूं तूफान हूं और तूफान से पहले की शांति भी मैं हूं इस धरती का मैं केंद्र बिंदु हूं प्रणाम मैं हिंदू हूं तो मुझे इतना ही आता है और मैं यही मैं ये तीन ही पैराग्राफ लिख पाया मुझे लगता है कि उसमें मैंने अच्छे से वर्णित कर दिया है कि मैं और मेरे जैसा हर शख्स कौन है दूसरी बात जब मैं किताब लिखना शुरू किया
- था तो मैं डिप्लोमेटिक नहीं हो पाता हूं तो मैं मैं लिख रहा था क्योंकि मैं ऐसा लिखना चाहता था और मैं अपने बच्चे के लिए अपने बेटे के लिए कहानी लिखने मैंने शुरू की थी उस समय पता नहीं था कि कहानी कहां पहुंचेगी और फोर्सेस तो दोनों साइड हमेशा रहेंगे यू ऑलवेज हैड टू चूज साइड्स आपको साइड चूज करना ही पड़ेगा आप चाहे या ना चाए और एक एक बात है कि बर्बरीक महाभारत के युद्ध के शुरुआत में बकुल बरबरी का गला काट के कृष्ण ने रख दिया था पहाड़ के ऊपर बक तो सबने पूछा कि ऐसा क्यों कि इतना बलशाली था वो उसको तो कन्विंसिबल सिर्फ देखो तो पूछा गया क्यों
- ऐसा कर दिया बरबरी के पास जब कृष्ण गए थे कि बताओ किसका पक्ष लोगे तो बर्बरीक ने एक अजीब सी बात कर दी थी बर्बरीक ने बोला था जो कमजोर पक्ष होगा मैं उसकी तरफ चला जाऊंगा हर का सहारा जो खाटू श्याम जी बा हां खाटू श्याम जी बोले मैं इनकी तरफ से लडूंगा फिर जब वो कमजोर हो जाएंगे तो मैं उधर चला जाऊंगा फिर इनकी तरफ से लडूंगा फिर वो कमजोर हो जाए मैं उधर चला जाऊंगा तो कृष्ण जी से जब पूछा गया कि गर्दन काट के क्यों टांग दिया व रख दिया वहां पे तो कृष्ण जी ने बोला कि हमेशा समाज के लिए वो लोग सबसे ज्यादा खतरनाक है जो किसी पक्ष में नहीं होते जिनको आज यूजुअली सेकुलर
- कहा जा सकता है कि भाई यू आर नॉट जस्ट पिंग अप अ साइड आप सही साइड ले गलत साइड ले वो अलग बात है लेकिन आपको साइड लेना पड़ेगा कर्ण की इतनी ज्यादा बात होती है कर्ण गलत साइड खड़े थे पर साइड तो था ना भीष्म पिता म गलत साइड थे द्रोणाचार्य गलत साइड थे कृपाचार्य वन ऑफ दज सेवन इ मोर्टल्स गलत साइड थे अश्वत्थामा गलत साइड थे मगर साइड तो चूज किया था तो ये ये बात है तो मैं आई एम वेरी क्लियर कि भाई मैं जो लिख रहा हूं मुझे उसम कन्विंसेस आगे जिसका इंटरेस्ट जागेगा वो ढूंढ के पढ़ लेगा अच्छा कण के बारे में आपने बोला तो एक सवाल जो मेरे मुझे लगता
- है कि हर किसी के मन में आता होगा कि कर्ण एक ऐसे अनसंग हीरो की तरह उनको देखा जाता है जी ना उनको एज अ नेगेटिव कैरेक्टर देखा जाता है ना एज अ पॉजिटिव कैरेक्टर देखा जाता है कहीं अ एक बीच की जो लाइन होती है जहां पे एक डिसीजन नहीं ले पाते हैं किसी एक पर्सनालिटी को लेकर के कण वैसी एक पर्सनालिटी बनकर हमारे जो इतिहास जो हमारे माइथोलॉजी पन्ने हैं उनमें रह गए हैं आपने स्मृति कितने लोगों से आज तक अपने इर्दगिर्द की बात कीजिएगा से यह सुना है कि मैंने मैंने एक्स वाईजी के लिए क्या कुछ नहीं किया मैंने सब किया जो मैं कर सकता था और
- वो बताने वाला ज्यादातर अपने आप को इस जगह पर रख के बात करता होता है कि देखो मेरे साथ क्या हो गया हम बिचारे पन का हम वो कि मैंने सब कुछ किया मैं लॉयल था ये था वो था पर देखो मेरे साथ क्या हो गया आज के समय में ना कं से ज्यादा लोग इसलिए रिलेट करते हैं क्योंकि आज लगभग सबके साथ वो हो रहा है जो उस वक्त कर्ण के साथ हुआ था जो उस वक्त कम होता था कर्ण के साथ शुरू से गलत हुआ पैदाइश हुई उनको बहा दिया गया वो थे क्षत्रिय लेकिन सूत के घर पे बड़े हुए सूत पुत्र कहलाए बड़े होते तक वो परशुराम जी ने प्रण ले लिया था कि मैं अब किसी
- क्षत्रिय को नहीं सिखाऊंगा बश पितामह से युद्ध के बाद उनको उसी से उन्हीं से सीखना था वो वहां पर झूठ बोल के गए सीख रहे थे तब परशुराम को पता चल गया जब पूरा सीख चुके थे तो परशुराम को पता चला य झूठ बोला है तो उन्होंने बोला जब सबसे ज्यादा तुमको जरूरत पड़ेगी तो तुम भूल जाओगे मेरे दिया पूरा ज्ञान ही भूल जाओगे उसी समय फिर अर्जुन ने मारा द्रौपदी के स्वयंवर के समय में यह भी आए थे लेकिन उस समय बोला गया नहीं नहीं तो क्षत्रियों का वो चल रहा है तो यह तो सूत पुत्र है यह इस पर पार्टिसिपेट नहीं कर सकता तो दुर्योधन ने बोला कि मैं इसको अंग देश का राजा बनाता
- हूं वो पहले बात हुई थी कि ये राजा नहीं है इसलिए नहीं तो बोले मैं अंग देश का राजा बनाता हूं अब ये राजा है करेगा पार्टिसिपेट तो फिर खड़े हो गए बोले नहीं राजा होने से क्या होता है इसमें क्षत्रिय खून नहीं है तो सूत पुत्र है उसके बाद जो कवच कमांड वो हमेशा देते रहे देते रहे देते रहे एक कहानी है कि जब वो एकदम लास्ट में मर रहे थे तो उनके पास कृष्ण पहुंचे बिल्कुल कि मुझे कुछ चाहिए तो वो मरते आदमी बोले अब क्या बचा अब क्या बचा मेरे पास तो बोले वो मरता हुआ व्यक्ति अपना खुद का दांत तोड़ा और दे दिया तो हम वी वांट टू बी कर्ण लेकिन हम ना कर्ण जितना दानवीर
- था वो बनना चाहते है लेकिन कर्ण जो कुछ झेला ना वो झेलना नहीं चाहते तो ज्यादातर लोग आजकल कर्ण के साथ इसलिए रिलेट करते हैं क्योंकि सभी को लगता है कि मेरे साथ जो हो रहा है ठीक नहीं हो रहा अच्छा अक्षत क्योंकि मैंने बहुत सारे इंटरव्यूज में आपको सुना बहुत सारी कहानियां है आपके खुद की क्योंकि जब हम माइथोलॉजी की बात करते हैं सब्जेक्ट की बात करते हैं इतना विशाल है कि मतलब आधे घंटे एक घंटे में इस पूरे सब्जेक्ट को कवर कर पाना इंपॉसिबल है जब यह इतना वास है तो मुझे लगता है कि आपके साथ कई सारे इंटरव्यूज मुझे लगता है करने पड़ेंगे इस सब्जेक्ट को कवर करने के लिए
- लेकिन आपका कोई ऐसा एक्सपीरियंस हो जो अभी तक आपने कहीं नहीं शेयर किया हो जो आपको ल कि डिवाइन कनेक्शन या कुछ ऐसा इंसिडेंट हुआ हो जो कि नहीं पॉसिबल है या एक पैरानॉर्मल कह ले या उसको कहे डिवाइन कह ले जो कि आपकी आप बीती इंसिडेंट हो एक दो छोटे-छोटे ऐसे वाक्य हैं जो मैंने कहा है पर बहुत छोटे में कह के खत्म कर दिया वो बहुत ज्यादा मैंने उस बात नहीं की तो अभी तो मैं बहुत गर्व से कह रहा हूं कि मैं हिंदू हूं लेकिन एक बहुत अजीब सी बात मेरे साथ हुई थी पत्थर साहब गुरुद्वारे में ये है ले में हम तो जब आप ले घूमने जाते हैं तो
- वहां पर कुछ चीजें बताई जाती है आपको कि ये जरूर चले जाना दोपहर के समय वहां चले जाना तो वहां लंगर हो जाएगा तो एक टाइम का मील हो जाएगा हम और आप चले जाते हैं क्योंकि आपको उससे कोई परहेज है नहीं तो मैं वहां गया और बिल्कुल खाली दिमाग से गया था जब मैं एज अ हिंदू मैं किसी देवी देवता के मंदिर जा रहा हूं तो मेरे दिमाग में एक श्रद्धा भाव होता है ना क्योंकि मेरी मान्यता मेरी आस्था उनमें है पर सखि जम में मेरी आस्था नहीं क्योंकि मैं उसका उस समुदाय का हिस्सा नहीं हूं मैं बहुत नॉर्मली गया और मुझे नहीं मालूम कि पत्थर साहब गुरुद्वारे का नाम पत्थर
- साब गुरुद्वारा क्यों है उस समय नहीं पता था मैं अंदर गया और मैं एक जगह पहुंचा मेरी वाइफ थी मेरे साथ और मैं उनसे कहा मैंने उनसे कहा कि मुझे बहुत जोर से रोना आ रहा है उस समय मुझे उस पल में मुझे किसी बात का दुख नहीं था मैं ले गया था घूमने मेरी माली हालत बहुत अच्छी थी मैं यहां से बहुत शांत था मैं किसी दुख तकलीफ से गुजर नहीं रहा था मेरे पास रोने का कोई कारण नहीं था और मैंने बोला कि मुझे बहुत जोर से रोना आ रहा है तो उन्होंने कहा कि आ रहा है तो रो लो और वहां जितने लोग थे मैं उन सबके बीच में खड़े हो गए वैसे धाड़ मार के मैं नहीं
- रोया लेकिन एक रोता हुआ चेहरा जितना बुरा दिख सकता है मैं उतना बुरा खड़े होकर रो रहा था बेशर्मी से आंसू बह रहे थे और मुझे नहीं पता कि मैं क्यों रो रहा था फिर बाद में मुझे उस जगह के बारे में पता चला कि भाई वो पत्थर साहब गुरुद्वारा क्यों बोलते हैं उसका बै स्टोरी क्या है वो मेरे लिए बड़ा डिवाइन था क्योंकि अगर यही चीज मेरे किसी दार्शनिक स्थल पर हो जाता मेरे किसी देवी देवता के मंदिर में हो जाता तो मुझे लगता कि यह मेरी श्रद्धा है कि यह मेरे अंदर से हो रहा है क्योंकि मेरी मान्यता उसम वैष्णो देवी में होता कहीं होता वो जिस जगह पे हुआ ना वो मेरे
- लिए बड़ा नया था और अभी रिसेंटली हम लोग स्पति वैली जा रहे थे मैं अघोरियों का अध्ययन बहुत पास से किया हू मैं काफी अघोरियों से मेरी मुलाकात हुई तो अघोरियों के लिए लो लेके जो डर है वो डर मुझ में इसलिए नहीं है क्योंकि मुझे मालूम है कि वो हार्मलेस होते हैं पर हमारे ही बीच में कुछ लोगों ने ऐसी कहानियां बना रखी है कि वो तो कैनिबल होते हैं और वो तो मार के खा जाते हैं और शव के ऊपर बैठ के साधना करते करते इन सब बातों में से कुछ भी गलत नहीं है सिवाय इसके कि वो मार के खा जाते हैं ऐसा नहीं करते हैं वो पहले समय में डेड बॉडीज पे वो अपना पेट भरने का काम किया
- करते थे पर उसके पीछे भी एक पूरा प्रोसेस और एक कारण है उनका मानना है कि उसमें उसमें से आत्मा जा चुकी है जी तो अगर आप नॉनवेज में चिकन मटन खाते हैं और आपके लिए वो नॉर्मल है तो वेजिटेरियन के लिए तो आप भी कैनिबल है ना कि बापरे कैसे तुम मांस खा सकते हो उनके लिए किसी भी मांस में किसी भी कपड़े में किसी भी खाने के पदार्थ में हर वो चीज जिसमें एनर्जी है जो आप कंज्यूम कर सकते हैं वो एनर्जी के फॉर्म में दे कैन कंज्यूम दे डू जितना एक वेजिटेरियन के लिए अजीब हो जाता है उतना सबके लिए कैनिबलिज्म अजीब हो जाता है उनको वो नहीं दिखता है उनको दिखता है कि यह
- हमारा पद्धति है शिफ्ट तक पहुंचने में क्यों है आप देखिए आप अपने घर में बच्चे को बोलते हैं ना बच्चा भगवान का रूप है कहते हैं फिर एक उम्र आती है जब आप उसी बच्चे को भगवान का रूप बोलना बंद कर देते ये वो समय आता है जब आप उसको सिखा चुके होते हैं कि बेटा यह अच्छा है यह बुरा है ये छि छी है साफ है जब तक उस बच्चे को इन चीजों की समझ नहीं होती है तब तक आप बोलते कि बच्चे में भगवान का रूप वो बच्चे की उस पद्धति से शिव तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं कुछ अच्छा कुछ बुरा कुछ साफ कुछ गंदा होता ही नहीं है उनके लिए सब एक जैसा है हर चीज शिव का बनाया हुआ है हर वो चीज जो
- कंज्यूम की जाती है वो कर लेते हैं एक ही भाव से उनके लिए पत्ता और मांस एक ही बात तो मैं उनसे दो अघोरियों से मैं मिला मैं उनकी मदद करना चाह रहा था क्योंकि बड़े टफ टेरेन में वो लोग पैदल नंगे पैर चल रहे थे मैं उनके पास गया और मैंने बोला कि बताइए मैं क्या करूं तो अचानक से दो में से एक बोला कि तस्वीरें हैं मेरे पास मैं भेज दूंगा आपको बोले मांस खिला दे मांस खिला दे तो उनको नहीं पसंद आता है कि आप उनके ज्यादा क्लोज आए आप उनको ज्यादा जानने की कोशिश करें वो मोह माया से परे हैं तो उनको लगता है इतना क्यों घुस रहा है ये तो
- वो चाहते हैं कि आप घबरा जाओ डर जाओ चले जाओ तो और उतना बोल के वो अपना ये वाला पार्ट काटने लग गए खद अपने ही हाथ का मुझे मालूम था मतलब मैं ऐसा कोई बहुत अपने आप को सैक्रिफिशियल या कर्ण नहीं बता रहा हूं कि मैंने अपना हाथ बढ़ा दिया कि आप खा लीज मुझे मालूम था कि वो नहीं काटेंगे तो मैं बोला लीजिए खा लीजिए तो उनको वो बात बहुत अच्छी लगी कि यार कार में जाता हुआ एक बंदा जो दिखने में भी नॉर्मल लोअर ट्रैक सूट पहना ऐसा भी नहीं कि बाबा टाइप का बंदा तो फिर उन्होंने अपना ऐसे बाल तोड़ा गुच्छा बाल दिया और बोले रख ले कुछ बुरा नहीं होगा तेरा जो तू जो चाहे होगा इसको
- संभाल के तो वो जिसके पास कुछ नहीं था उसने मेरे को अपने पास से कुछ देके भेज दिया मैंने 500 का नोट दिया वो नहीं लिए पहले बोले मानस खिला दे आसपास कुछ नहीं था मैं बोला ऐसा कुछ मांगे जो मैं दे सकू तो बोले जा तू तो मैं बोला नहीं मैं कुछ करना चाह रहा बता बोले खड़ाऊ दिला दे अब वो खड़ा लकड़ी का चपल ड़ का खड़ा कहां से मैं बोला य मैं बोला कैसे कर बोले वही तो समझा रहा हूं कुछ नहीं दे सकता तू जा लेकिन ऐसा करके ड़ तो वो वो मेरे बड़ा बड़ी अजीब सी बात थी कि देखिए जो देना चाहता वो करण वाली बात है ना कि आखिरी में दांत भी तोड़
- के दे रहा है वो अपना कवच जो शरीर से चिपका हुआ है उसको निकाल के दे दिया हुआ आदमी तो यह वैसे ही लोग हैं तो यह सब सुनने में बड़ा अच्छा लगता है पर जब आप एक्चुअली एक्सपीरियंस करते हैं ना तो एकदम पता नहीं कुछ और ही होता है

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